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सारंगढ़-बिलाईगढ़// संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में मंडल स्तर पर आयोजित हो रहे हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला के तहत साल्हेओना मंडल में एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय परिसर में संपन्न हुआ, जहां सनातन धर्म की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद अतिथियों का स्वागत चंदन तिलक, माल्यार्पण, श्रीफल और शाल से किया गया। स्वागत की जिम्मेदारी ईश्वर प्रसाद साहू, जयप्रकाश पटेल, चूड़ामणि पटेल, जयरतन पटेल और गजिंदर पटेल ने निभाई।
मुख्य अतिथि स्वामी शिवानंद गौसेवा आश्रम भीखमपुरा से पहुंचे महामंडलेश्वर रामप्रिय दास ने शास्त्रीय उदाहरणों के माध्यम से जातिप्रथा का खंडन किया। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से हिंदू राष्ट्र रहा है और अपने देश, धर्म और संस्कृति के लिए स्वयं को समर्पित करना ही सच्चे हिंदू होने की पहचान है। उन्होंने आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए समाज को जागरूक रहने की अपील की।
मुख्य वक्ता के रूप में रायगढ़ के विभाग प्रचारक राजकुमार भारद्वाज ने समाज के महापुरुषों के योगदान को याद करते हुए उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने श्रीराम के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि त्याग और तपस्या के मार्ग से ही आदर्श स्थापित होते हैं। साथ ही, छोटे-छोटे सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जोड़ने और ‘पांच परिवर्तन’ की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने की जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि हरिनाम भिक्षुक गुरु नरसिंह दाश ने अपने संबोधन में आचरण सुधार पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रहन-सहन, वेशभूषा और व्यवहार में सादगी और अनुशासन अपनाना जरूरी है तथा नर-नारायण के स्वरूप को पहचानकर उसी अनुरूप जीवन जीना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजकुमार नायक ने की, जबकि संचालन राधामोहन पाणिग्राही ने किया। इस अवसर पर युवराज चौधरी, पूजा संतोष चौहान, मदनकुमारी शौकीलाल सहिस, भुवन पटेल, तेजप्यारी अरुण सिदार, हितेश मालाकार, रत्नाबाई लखन सारथी सहित वंदे युवा समिति के पदाधिकारी, सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य-दीदी और हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।




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