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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का सरिया तहसील क्षेत्र इन दिनों कई कारणों से लगातार चर्चा में बना हुआ है। क्षेत्र में अवैध डोलोमाइट खनन, शासकीय भूमि पर कब्जे और कोटवारी भूमि के उपयोग को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब कोटवारी जमीन पर कथित अवैध कब्जा, खरीद-फरोख्त और मकान-बाड़ी निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिससे राजस्व व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार सरिया तहसील क्षेत्र में डोलोमाइट पत्थर के अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। क्षेत्र के कई गांवों में खदान संचालन और पत्थर क्रेशरों में बड़े पैमाने पर पत्थर खपाए जाने की बातें स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सबसे गंभीर सवाल उन कोटवारी जमीनों को लेकर उठ रहे हैं, जिन्हें मूल रूप से ग्राम कोटवारों के दायित्व निर्वहन और शासकीय व्यवस्था से जुड़े उपयोग के लिए चिन्हित किया गया था। अब इन्हीं जमीनों पर कथित रूप से निजी उपयोग, निर्माण कार्य और कब्जे की चर्चा ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि आखिर कोटवारी भूमि, जिसकी प्रकृति शासकीय और सीमित उपयोग वाली मानी जाती है, वहां किस आधार पर मकान-बाड़ी और अन्य निर्माण खड़े हो रहे हैं। यदि किसी भूमि की खरीदी-बिक्री या निजी उपयोग की अनुमति नहीं है, तो फिर इस तरह के निर्माण और कथित लेन-देन कैसे संभव हो रहे हैं? क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ स्थानों पर कोटवारी भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त का खेल लंबे समय से चल रहा है और इस पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से मामला और गंभीर होता जा रहा है।
इन मामलों के सामने आने के बाद राजस्व विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। लोगों के बीच चर्चा है कि जिन जमीनों की निगरानी और अभिलेखीय सुरक्षा की जिम्मेदारी व्यवस्था पर है, वहां लगातार विवाद और कब्जे की स्थिति आखिर कैसे बन रही है। इसी बीच संबंधित ग्राम कोटवार की जीवनशैली और कोटवारी भूमि पर निर्माण को लेकर भी क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि इन दावों और चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इस पूरे मामले में जुड़े तथ्यों, संबंधित भूमियों और जिम्मेदार पक्षों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई है, जिन पर अगली कड़ी में विस्तार से चर्चा की जाएगी।


