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सारंगढ़-बिलाईगढ़// जिले के सरसींवा क्षेत्र अंतर्गत वनांचल ग्राम पिरदा (भटगांव) में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों की आबादी वाले इस क्षेत्र का उप स्वास्थ्य केन्द्र सिर्फ कागजों में संचालित हो रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में ग्रामीणों को बुनियादी इलाज के लिए भी भटकना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती और शिशुवती महिलाओं को हो रही है, जिन्हें प्रसव के लिए भटगांव या बिलाईगढ़ जैसे दूरस्थ अस्पतालों तक जाना पड़ता है।
रात में ताला, आपात स्थिति में कोई व्यवस्था नहीं
ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य केन्द्र में रात के समय ताला लगा रहता है और आपातकालीन स्थिति में कोई भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होती। प्रसव पीड़ा होने पर महिलाओं को जोखिम उठाकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना और जनहानि की आशंका बनी रहती है।
आदेश जारी, फिर भी पदस्थापना नहीं
शासन के आदेश (क्रमांक 2573, दिनांक 30 जून 2025) के तहत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता कु. इंका साहू का स्थानांतरण पिरदा किया गया था। बाद में संलग्नीकरण समाप्त करने का आदेश (क्रमांक PA/2026/31, दिनांक 12 मार्च 2026) भी जारी हुआ, लेकिन अब तक उन्हें पिरदा में पदस्थ नहीं किया गया। इससे उप स्वास्थ्य केन्द्र में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता का पद खाली पड़ा है।
ग्रामीणों ने उठाई आवाज, कलेक्टर को सौंपा आवेदन
ग्राम पंचायत पिरदा की सरपंच जानकी पटेल और ग्राम पंचायत गेड़ागली की उपसरपंच ने कलेक्टर को आवेदन देकर मांग की है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता को तत्काल पिरदा में पदस्थ किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति उनके जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार के साथ खिलवाड़ है।
बड़ा सवाल: आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शासन के स्पष्ट आदेश जारी हो चुके हैं, तो उनका पालन अब तक क्यों नहीं हुआ। पिरदा का उप स्वास्थ्य केन्द्र प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता है या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही व्यवस्था जागती है।


