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सारंगढ़ बिलाईगढ़// सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक के कृषक ईश्वर सिदार द्वारा ऑयल-पाम के पौधों का रोपण वर्ष 2022 में किया गया है, जिसमें वर्तमान में उत्पादन प्राप्त हो रहा है। कृषक द्वारा 2 हेक्टेयर के क्षेत्र से 16 टन ऑयल पाम का उत्पादन प्राप्त किया जा रहा है। इस खेती के लिए लागत 35 हजार रूपये था, जिसकी बिक्री से आय 2 लाख 60 हजार रूपये की प्राप्ति हुई। इसमें किसान ईश्वर सिदार को 2 लाख 25 हजार रूपये का मुनाफा हुआ।
इसी प्रकार किसान ने ऑयल -पाम पौधों के बीच में टमाटर की खेती से रकबा 2 हेक्टेयर में 20 टन का उत्पादन किया, जिसमें किसान को 55 हजार रूपये का लागत आया। टमाटर की बिक्री से 2 लाख 25 हजार का आय मिला। इससे किसान को 1 लाख 70 हजार का मुनाफा हुआ। एक ही रकबे में कृषक द्वारा ऑयल-पाम के साथ-साथ टमाटर की फसल के रोपण से सम्मिलत रूप से लगभग 4 लाख की आय प्राप्त की जा रही है, जो अन्य कृषकों के लिए भी प्रेरणादायक है।
नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल-ऑयल पाम योजना कृषकों के लिए यह एक अच्छी योजना हैैै। यह योजना उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित है। 10 एकड़ में फसल उत्पादन पर बोरवेल एवं ट्रेक्टर के अनुदान का भी प्रावधान है। ऑयल पाम के पौधे 9 बाई 9 मीटर की दूरी पर लगाये जाते है, जिसके बीच में कोई भी फसल लगाया जा सकता है। ऑयल पाम की खेती ड्रीप में की जाती है। ड्रीप हेतु भी अनुदान का प्रावधान है। ऑयल पाम लगाने के तीसरे साल के बाद निरंतर और निश्चित लाभ देने वाली फसल है। इसकी खेती से प्रति एकड़ प्रति वर्ष 10 टन तक उत्पादन प्राप्त होता है। उत्पादित फलों के गुच्छो को गोदरेज एग्रोवेट कंपनी लिमिटेड द्वारा खरीदा जाता है जिसका मूल्य सरकार द्वारा सुनिश्चित किया गया है। विपरीत मौसम में भी यह फसल खराब नही होता है, रोग एवं कीटो का प्रकोप ना के बराबर होता है। इस फसल में चोरी की संभावना नहीं है।
ऑयल पाम रोपण हेतु कृषकों को विभाग के माध्यम से प्रति हे. 145 पौधे के मान से 7150 पौधे कृषकों को प्रदाय किए गए हैं। ऑयल-पाम के पौधों से उत्पादन तीसरे साल से प्रारम्भ होता है, जिसमें कृषक प्रारंभिक वर्षों में अंतरवर्तीय फसल लेकर लाभ प्राप्त कर रहें है, जिस हेतु शासन द्वारा प्रति हे. 10250 रू. के मान से अनुदान दिया जा रहा है। कृषकों के प्रक्षेत्रों में ऑयल पाम उत्पादित फलों के गुच्छो को गोदरेज एग्रोवेट कंपनी लिमिटेड द्वारा समर्थन मूल्य (वर्तमान मूल्य) 1750 रू. प्रति क्विंटल पर खरीदा जाता है, जिससे कृषकों को बिक्री हेतु बाजार जाने की आवश्यकता नहीं होती है। शासन की इस योजना में कृषकों का रूझान पिछले दो वर्षों में बढ़ा है पिछले वर्षों में अब तक 50 हेक्टेयर (123 एकड़) क्षेत्र में ऑयल-पाम के पौधों का रोपण किया जा चुका है।


