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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया विद्युत विभाग में एक बार फिर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। 11 केवी लाइन पर मरम्मत कार्य के दौरान एक संविदाकर्मी करंट की चपेट में आ गया। गनीमत रही कि उसी समय लाइन ट्रिप हो गई, जिससे उसकी जान बच गई। हालांकि हादसे में उसका एक हाथ बुरी तरह झुलस गया और उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए रायगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ ही सप्ताह पहले इसी तरह की एक घटना में एक ठेका कर्मी की जान जा चुकी है।
नदीगांव-बुदबुदा फीडर में हो रहा था मरम्मत कार्य
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को पंचधार विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले नदीगांव-बुदबुदा 11 केवी फीडर में मरम्मत कार्य किया जा रहा था। संविदाकर्मी अजय कुमार ध्रुव अपने सहकर्मी पद्मलोचन मेहर के साथ बिजली के पोल पर चढ़कर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि काम शुरू करने से पहले लाइनमैन के माध्यम से बिजली सप्लाई बंद कराई गई थी और आवश्यक अनुमति भी ली गई थी। लेकिन काम के दौरान अचानक लाइन में बिजली प्रवाहित हो गई, जिससे अजय ध्रुव करंट की चपेट में आ गया। सौभाग्य से उसी दौरान लाइन ट्रिप हो गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। यदि लाइन ट्रिप नहीं होती तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।
एक हाथ बुरी तरह झुलसा, रायगढ़ में इलाज जारी
हादसे में अजय ध्रुव का एक हाथ गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद विभाग में अफरा-तफरी मच गई और घायल कर्मचारी को तत्काल रायगढ़ के एक निजी अस्पताल भेजा गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है और उपचार जारी है।
अधिकारियों से जवाब नहीं मिला
घटना के बाद हमारी टीम ने पूरे मामले की जानकारी लेने के लिए संबंधित लाइनमैन मनीष डनसेना, सरिया विद्युत विभाग के जेई मदन नायक सहित अन्य कर्मचारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद बरमकेला मुख्यालय के सहायक अभियंता (एई) गजाधर सिदार से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। जानकारी जुटाकर कॉल करेंगे।
उपकेंद्र पहुंची टीम, ऑपरेटर ने क्या बताया
घटना की वास्तविक स्थिति जानने के लिए हमारी टीम सीधे पंचधार विद्युत उपकेंद्र पहुंची। वहां ड्यूटी पर मौजूद ऑपरेटर सुरेश कुमार सिदार से बातचीत की गई। उसने बताया कि घटना के दौरान भी उसी की ड्यूटी थी, इस बीच लाइनमैन मनीष डनसेना द्वारा शाम 5:13 बजे से 5:58 बजे तक नदीगांव-बुदबुदा बस्ती 11 केवी लाइन पर कार्य करने के लिए परमिट लिया गया था। इस दौरान संबंधित लाइन बंद थी, लेकिन पंप फीडर की सप्लाई चालू थी, जो शाम 5:24 बजे ट्रिप हुई। ऑपरेटर के अनुसार, संभवतः इसी समय हादसा हुआ। हालांकि बातचीत के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि आखिर बिजली सप्लाई दोबारा कैसे आई और दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या थी।
आखिर गलती किसकी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मरम्मत कार्य के लिए लाइन बंद कर परमिट जारी किया गया था, तो फिर कार्य के दौरान लाइन में बिजली कैसे आ गई? क्या तकनीकी गड़बड़ी हुई? क्या किसी ने बिना जानकारी के सप्लाई चालू कर दी? या सुरक्षा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया? इन सवालों का जवाब अभी तक विभाग की ओर से नहीं दिया गया है। विभागीय अधिकारी भी इस मामले में खुलकर कुछ बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह कोई पहला मामला नहीं है। 20 जून को भी सरिया क्षेत्र में विद्युत विभाग की कथित लापरवाही के चलते ठेका कर्मी श्रवण कुमार यादव की करंट लगने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके अलावा करीब दो वर्ष पहले जामपाली क्षेत्र में भी एक ठेका कर्मी 11 केवी लाइन पर काम करते समय करंट की चपेट में आ गया था, जिसमें उसके शरीर का एक हिस्सा पूरी तरह झुलस गया था।
कब सुधरेगी व्यवस्था?
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विद्युत विभाग में सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन हो रहा है? संविदा और ठेका कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर विभाग कितना गंभीर है? फिलहाल विभाग की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या फिर यह घटना भी पूर्व की घटनाओं की तरह केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगी।


