जिला CEO का एक्शन मोड: बरमकेला और बिलाईगढ़ ब्लॉक के स्वच्छ भारत मिशन में बड़ा खुलासा, अधूरे शौचालयों को पूर्ण दिखाने का खेल बेनकाब, नोटिस जारी..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की सच्चाई सामने आने के बाद जिला पंचायत प्रशासन सख्त कार्रवाई के मूड में है। निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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CEO के निर्देश पर हुआ बड़ा खुलासा

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंद्रजीत बर्मन के निर्देश पर जिला समन्वयक निमिष कुमार साव ने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित सामुदायिक शौचालयों का भौतिक सत्यापन कराया। यह जांच विशेष रूप से विकासखंड बरमकेला और बिलाईगढ़ में की गई, जहां कई गांवों में भारी गड़बड़ी सामने आई।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई स्थानों पर शौचालय निर्माण अधूरा था, लेकिन कागजों में उन्हें पूर्ण दर्शाकर मूल्यांकन कर दिया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी योजनाओं की साख पर भी सवाल खड़ा करता है।

बरमकेला में इन अधिकारियों पर आरोप

जांच में सामने आया कि बरमकेला विकासखंड में लक्ष्मी जांगड़े (सहायक अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा), योगेश देवांगन (तकनीकी सहायक) – ग्राम बारादावन, कोमल सिंह मरकाम – ग्राम सावतकुंत, मिथलेश बंजारे – ग्राम सेमिकोट, लामिपाली, जालाकोना, अमलीपाली, नवल किशोर सिदार – ग्राम डोंगरीपाली, रंगाडीह, गोरडीह, परसकोल, सिंघारी, कुम्हारी, मेडरा इन सभी द्वारा अपूर्ण शौचालयों को पूर्ण दर्शाकर मूल्यांकन किए जाने की पुष्टि हुई।

बिलाईगढ़ में भी सामने आई समान गड़बड़ी

इसी तरह बिलाईगढ़ विकासखंड में आकाश देवांगन (सहायक अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और लकेश्वर महिलाने (तकनीकी सहायक) द्वारा ग्राम ठाकुरदिया, बरभांठा, दाउबंधान, घोघरी, धौराभांठा, बेलमुंडी, लखुर्रीडीह, पचपेड़ी और खुरदरहा में अधूरे शौचालयों को पूर्ण दिखाकर मूल्यांकन किया गया।

जिम्मेदारों को कारण बताओ नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत प्रशासन ने संबंधित सभी तकनीकी सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। सभी को निर्धारित समय सीमा में जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। CEO ने साफ कहा है कि लापरवाही और कर्तव्यहीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों और पारदर्शिता की अनदेखी की गई। अधूरे कार्यों को पूर्ण दिखाना सीधे तौर पर शासन के नियमों के खिलाफ है और यह जनता के अधिकारों के साथ भी अन्याय है। जिला पंचायत प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि आगे सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार ही पूरे कराए जाएंगे। उद्देश्य है कि आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिलें और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

अब सबकी नजर कार्रवाई पर

इस बड़े खुलासे के बाद अब नजर इस बात पर टिकी है कि दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या वास्तव में जमीनी स्तर पर सुधार देखने को मिलेगा। फिलहाल प्रशासन के सख्त रुख से यह संकेत जरूर मिल गया है कि गड़बड़ी करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।

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