छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा साइंस सेंटर कोरबा में बनेगा, 25 करोड़ रुपये से संवरेगी विज्ञान की दुनिया, रोबोटिक्स से प्लेनेटोरियम तक होंगी आधुनिक सुविधाएं..

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रायपुर// छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में कोरबा एक नई पहचान बनाने जा रहा है। औद्योगिक नगरी कोरबा में 25 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का सबसे बड़ा साइंस सेंटर बनाया जाएगा। रिस्दी रोड पर विकसित होने वाले पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर साइंस एवं कन्वेंशन सेंटर का गुरुवार को प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने भूमिपूजन किया। सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद में बनने वाला यह केंद्र विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर विज्ञान को प्रयोगों और प्रत्यक्ष अनुभवों के जरिए समझने का अवसर देगा।

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कोरबा में बनने जा रहा ये साइंस सेंटर करीब 1.30 लाख वर्गफीट क्षेत्र में विकसित होगा। इस परियोजना की खासियत यह है कि यहां विज्ञान, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स, खनन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़े विषयों को एक ही परिसर में समझने का अवसर मिलेगा। इससे कोरबा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के विद्यार्थियों को विज्ञान और नवाचार की दुनिया से जुड़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध हो सकेगा। साइंस सेंटर को विद्यार्थियों की जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच विकसित करने के उद्देश्य से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। प्रस्तावित केंद्र में रोबोटिक्स जोन, स्पेस जोन, प्लेनेटोरियम और माइनिंग एक्सपीरियंस जोन जैसे आकर्षण शामिल होंगे।

इसके अलावा कल्चरल सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा रियलिटी आधारित तकनीकी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थी रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों को समझ सकेंगे। स्पेस जोन और प्लेनेटोरियम उन्हें अंतरिक्ष की दुनिया से परिचित कराने में मदद करेंगे। वहीं, माइनिंग एक्सपीरियंस जोन कोरबा जैसे प्रमुख खनन क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए खास उपयोगी हो सकता है, जहां वे खनन से जुड़ी प्रक्रियाओं और तकनीक को करीब से समझ पाएंगे। इस केंद्र का उद्देश्य विज्ञान को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रयोग, गतिविधियों और व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से रोचक बनाना है। इससे विद्यार्थियों में सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने में मदद मिलेगी।

चंद्रयान-मंगलयान जैसे अभियानों की तकनीक समझ सकेंगे विद्यार्थी

मंत्री लखन लाल देवांगन ने भूमिपूजन समारोह में कहा कि साइंस सेंटर का निर्माण कोरबा के इतिहास में एक नया वैज्ञानिक अध्याय जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से बच्चों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सीखने के नए अवसर मिलेंगे। विद्यार्थी वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिए नई-नई चीजों को समझ सकेंगे और चंद्रयान तथा मंगलयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों के बारे में भी जान पाएंगे।

मंत्री ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह केंद्र बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस परियोजना को विकसित भारत-2047 की संकल्पना से जोड़ते हुए शिक्षा, कौशल और तकनीक के क्षेत्र में निवेश को जरूरी बताया।

CSR से शिक्षा और शहर के विकास को मिल रही गति

इस साइंस सेंटर की एक अहम विशेषता यह है कि इसका निर्माण अडानी फाउंडेशन के सहयोग से CSR मद में किया जा रहा है। इससे औद्योगिक क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी के तहत शिक्षा और तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि जिला प्रशासन और उद्योगों के सहयोग से इस परियोजना को आकार दिया जा रहा है। उनके अनुसार, केंद्र में आधुनिक सुविधाएं विकसित होने से विद्यार्थियों को अपने ही जिले में विज्ञान और तकनीक से जुड़े अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिले के पीएम श्री विद्यालयों के विद्यार्थियों के अहमदाबाद स्थित साइंस सेंटर भ्रमण के दौरान वहां की सुविधाओं का अवलोकन किया गया था। कोरबा में भी इसी तरह की आधुनिक सुविधाएं विकसित होने से स्थानीय विद्यार्थियों को विज्ञान और नवाचार की दुनिया को समझने के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। कलेक्टर ने यह भी कहा कि उद्योगों की सहभागिता से शहर में सड़क, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को गति मिल रही है। CSR के जरिए विकास कार्यों में उद्योगों की भागीदारी कोरबा के समग्र विकास में योगदान दे रही है।

विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने में मिलेगी मदद

कोरबा की महापौर संजूदेवी राजपूत ने कहा कि साइंस सेंटर के निर्माण से बच्चों को विज्ञान के अलग-अलग क्षेत्रों को जानने और आधुनिक तकनीक को समझने का अवसर मिलेगा। यह केंद्र विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने, उनकी जिज्ञासा बढ़ाने और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में सहायक होगा। कोरबा पहले से ही देश के प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा केंद्रों में शामिल है। ऐसे में विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा से जुड़ी यह परियोजना शहर के विकास को एक नया आयाम दे सकती है। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह केंद्र उपयोगी साबित हो सकता है, जो रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान, AI और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में भविष्य बनाना चाहते हैं।

कोरबा को मिलेगी विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान

25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह साइंस सेंटर केवल एक भवन या प्रदर्शनी स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे विद्यार्थियों के लिए सीखने और प्रयोग करने के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान, प्लेनेटोरियम और AI जैसी सुविधाएं बच्चों को बदलती तकनीकी दुनिया से परिचित कराने में मदद कर सकती हैं। परियोजना पूरी होने के बाद कोरबा के विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक को समझने के लिए अपने जिले में ही एक नया मंच मिलेगा। इससे विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और भविष्य के तकनीकी कौशल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर तैयार हो सकते हैं।

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