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रायपुर// छत्तीसगढ़ सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी खरीदी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने साड़ी खरीदी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीकृत खरीदी प्रणाली को समाप्त कर दिया है। अब साड़ी खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस निर्णय से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यकर्ताओं को अपनी आवश्यकता एवं पसंद के अनुसार साड़ी खरीदने की सुविधा मिलेगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है। हाल के समय में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर प्राप्त शिकायतों और सुझावों के आधार पर सरकार ने केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब संचालनालय स्तर पर साड़ियों की खरीदी नहीं की जाएगी। इसके बजाय साड़ी खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
इससे खरीद प्रक्रिया सरल होगी और बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो जाएगी। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व्यवस्था के माध्यम से शासन की राशि बिना किसी मध्यस्थ के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचेगी। हालांकि साड़ी खरीदी की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, लेकिन साड़ी का रंग और डिजाइन विभाग की ओर से तय किया जाएगा।
इसकी जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगीए जिससे पूरे प्रदेश में यूनिफॉर्म की एकरूपता बनी रहे। वहीं कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी सुविधा के अनुसार कपड़े की गुणवत्ता और प्रकार का चयन कर सकेंगी। भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है। इसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। नई व्यवस्था के तहत यही राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी।
पारदर्शिता और सुविधा पर जोर
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि कार्यकर्ताओं को अपनी जरूरत और पसंद के अनुरूप साड़ी खरीदने की स्वतंत्रता भी मिलेगी। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि विभाग में लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है और जहां भी सुधार की आवश्यकता होगीए वहां हितग्राहियों के हित में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक सुधार और पारदर्शी शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा हैए जिससे प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।



