75 लाख की ठगी: ई-मेल व मोबाइल नंबर बदलकर ठगों ने कर दिया खेला, डिमैट खाते से शेयर व म्यूचुअल फंड अपने नाम कर लिये ट्रांसफर..

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बिलासपुर// बिलासपुर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। अज्ञात बदमाशों ने एक व्यवसायी के माता-पिता के डिमैट खाते से जुड़ी ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर बदलकर करीब 75 लाख रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड अपने नाम ट्रांसफर कर लिए। मामले की शिकायत के बाद तारबाहर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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डिमैट खाते में बिना जानकारी किए गए बदलाव

क्रांति नगर निवासी व्यवसायी रत्नेश दुबे (47) ने पुलिस को बताया कि उनके माता-पिता शकुंतला दुबे और रमेश प्रसाद दुबे के नाम से एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज में एक संयुक्त और एक व्यक्तिगत डिमैट खाता संचालित था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना खातों से जुड़े ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर बदल दिए गए। इसके बाद खातों में बड़े पैमाने पर शेयर और म्यूचुअल फंड का ट्रांसफर कर दिया गया।

12 जनवरी को हुआ ठगी का खुलासा

रत्नेश दुबे के अनुसार, 12 जनवरी को जब उन्होंने खातों की जानकारी जुटाई तो अनियमितताओं का पता चला। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर और रायपुर स्थित एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के अधिकारियों से संपर्क किया। साथ ही 26 जनवरी को कंपनी के आधिकारिक ई-मेल पर पूरे मामले की शिकायत भी भेजी।

शिकायत के अनुसार, 5 दिसंबर 2023 को वेंचुरा सिक्योरिटीज से 31.25 लाख रुपये से अधिक मूल्य के शेयर और करीब 44.35 लाख रुपये के म्यूचुअल फंड एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। पीड़ित का कहना है कि इन ट्रांजेक्शन की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं, खातों से संबंधित पूरी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। एक बैंक खाते का बैलेंस शून्य बताया गया, जबकि दूसरे खाते की जानकारी देने से इनकार कर दिया गया।

कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह

शिकायतकर्ता ने एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के कुछ कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और नुकसान की भरपाई की मांग की है। तारबाहर थाना पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद मामले को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और धारा 316(5) के तहत अपराध दर्ज किया है।पुलिस अब यह पता लगा रही है कि ई-मेल और मोबाइल नंबर कैसे बदले गए, ट्रांजेक्शन किन आईपी एड्रेस से किए गए, पैसा किन खातों में गया और इस पूरे फर्जीवाड़े में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।

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