रायगढ़ में डिजिटल अरेस्ट ठगी का बड़ा खुलासा: 37 लाख की साइबर ठगी मामले में महिला समेत 5 आरोपी गिरफ्तार..

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रायगढ़// साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए रायगढ़ पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई लाखों की ठगी का पर्दाफाश किया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने राजस्थान के भीलवाड़ा से महिला सहित 5 अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया है। आरोपियों ने एक सेवानिवृत्त विद्युत विभाग के अधिकारी से 36.97 लाख रुपये की ठगी की थी। जांच में सामने आया कि यह गिरोह देशभर में सक्रिय था और अब तक 1.40 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुका है।

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फर्जी अफसर बनकर रचते थे डिजिटल अरेस्ट का खेल

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस और सीबीआई अफसर बताकर लोगों को डराते थे। पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी देकर वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट का झांसा दिया जाता था। डर के माहौल में फंसे लोग अपनी बैंक डिटेल और रकम आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। रायगढ़ के पीड़ित से भी 30 जनवरी से 11 फरवरी के बीच अलग-अलग खातों में करीब 37 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए।

बैंक ट्रेल और तकनीकी जांच से खुला पूरा नेटवर्क

साइबर पुलिस ने बैंक खातों की जांच, तकनीकी साक्ष्य और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में भीलवाड़ा के बंधन बैंक कर्मचारी राहुल व्यास की भूमिका सामने आई, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य रविराज सिंह, आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास को अलग-अलग स्थानों से पकड़ा गया। आरोपियों के पास से 7 मोबाइल, 1 लैपटॉप और कई संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें लाखों रुपये का लेन-देन सामने आया है।

देशभर में फैला था ठगी का जाल, कई और खुलासे बाकी

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह लंबे समय से साइबर ठगी में सक्रिय था और ऑनलाइन माध्यम से इस अपराध को सीखकर संगठित तरीके से अंजाम दे रहा था। ठगी की रकम का प्रतिशत तय कर आपस में बांटा जाता था। पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खाते सीज कर दिए हैं और अन्य संभावित साथियों की तलाश जारी है।

पुलिस की अपील: ऐसे कॉल से रहें सावधान

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लोगों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी सीबीआई या पुलिस अधिकारी बनकर आने वाले कॉल से सतर्क रहें। किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराए जाते। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत करें।

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