मुंगेली ITI भर्ती में बड़ा खेल? नियम बदलकर अपात्रों को नौकरी देने का आरोप, मामला पहुंचा मंत्रालय तक, हाई कोर्ट जाने की तैयारी..

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मुंगेली// जमकोर स्थित ITI में सत्र 2024-25 की मेहमान प्रवक्ता भर्ती अब गंभीर विवादों में घिर गई है। भर्ती प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार, नियमों में हेरफेर और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन जैसे आरोप लगे हैं। मामला अब मंत्रालय तक पहुँच चुका है और उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

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नियमों में बदलाव कर खेल?

आवेदक बसंत कुमार ने दस्तावेजों के साथ आरोप लगाया है कि भर्ती विज्ञापन की मूल शर्तों में जानबूझकर बदलाव किया गया। जहाँ “अथवा (OR)” लिखा था, उसे “एवं (AND)” में बदल दिया गया। आरोप है कि CTI/CITS जैसी योग्यता की प्राथमिकता को भी कमजोर किया गया, ताकि कुछ खास उम्मीदवारों को लाभ मिल सके और योग्य अभ्यर्थियों को तकनीकी आधार पर बाहर किया जा सके।

बसंत का कहना है कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव करना पूरी भर्ती को अवैध बना देता है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन है, जो समानता और समान अवसर की गारंटी देते हैं।

100 WPM की योग्यता भी नहीं आई काम

बसंत कुमार के पास CGBSE रायपुर से 2 वर्षीय ट्रेड स्टेनो टाइपिंग/हिंदी शॉर्ट हैंड में 100 शब्द प्रति मिनट की गति, NCVT से NTC प्रमाणपत्र, DGT संस्थानों से CTI/NCIC और तीन साल का अनुभव है। इसके बावजूद उन्हें यह कहकर अपात्र घोषित कर दिया गया कि उनका शपथ पत्र उपलब्ध नहीं है। बसंत का आरोप है कि यह केवल बहाना था और उन्हें सुनियोजित तरीके से बाहर किया गया।

अपात्र को मौका, बिना अनुभव चयन?

आरोप है कि जिस अभ्यर्थी का चयन किया गया, वह SCVT उत्तीर्ण है और उसके पास कोई अनुभव नहीं है। इतना ही नहीं, बसंत ने दावा किया है कि स्वीकृत पदों के औपचारिक सृजन से पहले ही मेरिट सूची को दरकिनार कर स्वेता ठाकुर (स्टेनो हिंदी) की ज्वाइनिंग करा दी गई। अगर यह सही है तो यह भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसे शक्ति के दुरुपयोग का मामला बताया जा रहा है।

जांच में भी सवाल

धांधली की शिकायत के बाद जांच उन्हीं अधिकारियों से कराई गई जो खुद चयन समिति का हिस्सा थे। यह स्थिति निष्पक्ष जांच की अवधारणा पर सवाल उठाती है। कानूनी सिद्धांत के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में निर्णायक नहीं हो सकता।

देरी पर भी दिया स्पष्टीकरण

बसंत कुमार का कहना है कि पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की सूची उस पोर्टल पर जारी नहीं की गई, जहाँ से आवेदन मांगे गए थे। सूचना का अधिकार कानून के तहत भी समय पर जानकारी नहीं दी गई। प्रथम अपील के बाद जानकारी मिलने पर उन्होंने 14 नवंबर 2025 से संयुक्त संचालक, बिलासपुर और विभागीय सचिव को लगातार शिकायतें भेजीं। उनका सवाल है कि प्रशासनिक चुप्पी का खामियाजा एक योग्य उम्मीदवार क्यों भुगते?

हाईकोर्ट जाने की तैयारी

बसंत कुमार ने कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव और संचालक (DTE) को साक्ष्य सौंपकर चयन सूची रद्द करने और योग्य अभ्यर्थी का चयन करने की मांग की है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो उच्च न्यायालय में रिट याचिका और अवमानना याचिका दायर की जाएगी। साथ ही मानसिक, आर्थिक और कानूनी खर्च की जिम्मेदारी तय करने की भी बात कही है।

अब सवाल यह है कि क्या विभाग इस विवाद पर खुलकर जवाब देगा या मामला अदालत की चौखट तक जाएगा। फिलहाल मुंगेली की यह भर्ती चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।

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