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रायपुर// राजधानी में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने तीन अवैध कॉल सेंटरों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये गिरोह रायपुर में बैठकर अमेरिका समेत अन्य देशों के लोगों को निशाना बना रहा था।
कार्रवाई एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना गंज व न्यू राजेंद्र नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने की। सुभाष नगर स्थित पिथालिया कॉम्प्लेक्स और रिंग रोड नंबर-1 स्थित अंजनी टॉवर में दबिश देकर इस पूरे नेटवर्क को पकड़ा गया।
जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर में काम करने वाले युवाओं को 15 हजार रुपये मासिक वेतन और कमीशन दिया जाता था, जबकि सुपरवाइजरों को 30 हजार रुपये वेतन के साथ ठगी की रकम का 2 प्रतिशत हिस्सा मिलता था। गिरोह के तार अहमदाबाद और विदेशों तक जुड़े हुए हैं।
ऐसे चलता था ठगी का पूरा खेल
पुलिस पूछताछ में इस गैंग के काम करने का तरीका बेहद सुनियोजित और कई चरणों में बंटा हुआ सामने आया।
पहला चरण: डेटा जुटाना और कॉल करना
कॉलिंग ग्रुप व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अमेरिका के बैंक लोन लेने वाले लोगों का डेटा जुटाता था। फिर इंटरनेट कॉलिंग ऐप के जरिए उनसे संपर्क किया जाता था। कर्मचारियों के सामने अंग्रेजी में स्क्रिप्ट लिखी रहती थी, जिसे पढ़कर वे भरोसा जीतते थे।
दूसरा चरण: सिबिल सुधार का झांसा
जब कोई व्यक्ति लोन लेने के लिए तैयार होता, तो उससे बैंक डिटेल लेकर उसे बताया जाता कि उसका सिबिल खराब है। फिर उसे सुधारने का भरोसा दिया जाता और कुछ देर बाद दोबारा कॉल करने की बात कही जाती थी। इस दौरान पूरी जानकारी सुपरवाइजर के जरिए ऊपर बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचती थी।
तीसरा चरण: फर्जी चेक का इस्तेमाल
टेक्निकल ग्रुप पीड़ित के खाते की जानकारी लेकर क्लोन चेक तैयार करता था और बैंक में लगाता था। छोटी राशि होने के कारण बैंक तुरंत रकम खाते में डाल देता था। इस काम में विदेश में बैठे सदस्य, खासकर चीन से जुड़े लोग शामिल थे, जो 10% कमीशन लेते थे।
चौथा चरण: भरोसा बनाना
जैसे ही पैसे खाते में आते, कॉलिंग टीम फिर सक्रिय होती और पीड़ित को बताया जाता कि उनका सिबिल स्कोर सुधार दिया गया है और उदाहरण के तौर पर खाते में 100 डॉलर डाले गए हैं। इससे पीड़ित का भरोसा पूरी तरह जीत लिया जाता था।
पांचवां चरण: गिफ्ट कार्ड के जरिए ठगी
इसके बाद पीड़ित से कहा जाता कि कंपनी का पैसा गिफ्ट कार्ड (Apple, Google, Amazon आदि) के रूप में वापस करें। पीड़ित खुशी-खुशी गिफ्ट कार्ड खरीदकर कोड शेयर कर देता था।
छठा चरण: रकम को कैश में बदलना
‘रिडीम ग्रुप’ गिफ्ट कार्ड की पूरी जानकारी लेकर उसे ऑनलाइन कैश में बदल देता था। यह नेटवर्क भारत के बड़े शहरों और विदेशों में फैला हुआ था।
अंतिम चरण: हवाला के जरिए ट्रांजैक्शन
ठगी की रकम हवाला के जरिए अहमदाबाद में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी। पूरी रकम की जानकारी केवल मास्टरमाइंड और रिडीम ग्रुप को ही होती थी।
फर्जी अरेस्ट वारंट और “डिजिटल अरेस्ट” का डर
आरोपी केवल लोन के नाम पर ही नहीं, बल्कि फर्जी अरेस्ट वारंट बनाकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर भी दिखाते थे। इससे पीड़ित मानसिक दबाव में आकर जल्दी पैसे ट्रांसफर कर देते थे।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान और दस्तावेज बरामद किए जिसमें 67 मोबाइल फोन, 18 लैपटॉप, 28 कंप्यूटर सेट और 3 वाईफाई राउटर मिला जिनकी कुल कीमत लगभग 16.53 लाख रुपये है। साथ ही लोन से जुड़े फर्जी दस्तावेज, स्क्रिप्ट और नकली अरेस्ट वारंट भी मिले।
इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अहमदाबाद में बैठा था, जबकि टेक्निकल और रिडीम ग्रुप के कुछ सदस्य विदेशों में सक्रिय थे। रायपुर में केवल कॉलिंग और ऑपरेशन का हिस्सा चलाया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपी
थाना गंज प्रकरण
- अनिल कुमार यादव उर्फ रोहित यादव – अहमदाबाद (गुजरात) / शंकर नगर, रायपुर
- सौरभ राजपूत – अहमदाबाद (गुजरात) / शंकर नगर, रायपुर
- अभिषेक शर्मा – गाजियाबाद (उ.प्र.) / लालपुर, रायपुर
- रोहित शर्मा – अहमदाबाद (गुजरात) / अवंति विहार, रायपुर
- सोनू कुमार भारती – बलिया (उ.प्र.) / लालपुर, रायपुर
- राहुल प्रजापति – अहमदाबाद (गुजरात) / अवंति विहार, रायपुर
- मयुर खडपे – अहमदाबाद (गुजरात) / लालपुर, रायपुर
- नितेश गुरूंग – मेघालय / लालपुर, रायपुर
- अजय चौधरी – मेघालय / लालपुर, रायपुर
- आदित्य कुमार – गुरुग्राम (हरियाणा) / लालपुर, रायपुर
- सागर कायस्थ – अहमदाबाद (गुजरात) / लालपुर, रायपुर
- निखिल क्षत्रिय – अहमदाबाद (गुजरात) / लालपुर, रायपुर
- चुन्ना पटेल – चित्रकूट (उ.प्र.) / लालपुर, रायपुर
- मोहम्मद अल्तमस – मऊ (उ.प्र.) / पचपेड़ी नाका, रायपुर
- विष्णु कुशवार – अहमदाबाद (गुजरात) / अवंति विहार, रायपुर
- ऋभ राज – पटना (बिहार) / अवंति विहार, रायपुर
- दिनेश लालवानी – अहमदाबाद (गुजरात) / महावीर नगर, रायपुर
- अनिकेत दुबे – अहमदाबाद (गुजरात) / अमलीडीह, रायपुर
- काजल आचार्यजी – मेघालय / बजाज कॉलोनी, रायपुर
- प्रकाश द्विवेदी – प्रयागराज (उ.प्र.) / बजाज कॉलोनी, रायपुर
- दीप सिंह यादव – अहमदाबाद (गुजरात) / महावीर नगर, रायपुर
- सत्यम तिवारी – प्रयागराज (उ.प्र.) / बजाज कॉलोनी, रायपुर
- मोहम्मद गुफरान हुसैन – प्रतापगढ़ (उ.प्र.) / अमलीडीह, रायपुर
- ओम कोढवले – सोलापुर (महाराष्ट्र) / अमलीडीह, रायपुर
- राजेन्द्र सिंह जाला – गुजरात / अमलीडीह, रायपुर
- शाह अमन – देवरिया (उ.प्र.) / अमलीडीह, रायपुर
- राज द्विवेदी – प्रयागराज (उ.प्र.) / महावीर नगर, रायपुर
- शिवम पांडे – प्रयागराज (उ.प्र.) / महावीर नगर, रायपुर
- रिषभ यादव – इटावा (उ.प्र.) / महावीर नगर, रायपुर
- करन परमार – गुजरात / शंकर नगर, रायपुर
- अमन पांडे – प्रयागराज (उ.प्र.) / शंकर नगर, रायपुर
- रोहित कुमार चंचल – आगरा (उ.प्र.) / अमलीडीह, रायपुर
- देवेश द्विवेदी – प्रयागराज (उ.प्र.) / शंकर नगर, रायपुर
थाना न्यू राजेंद्र नगर प्रकरण
- गौरव यादव – अहमदाबाद (गुजरात) / वीआईपी रोड, रायपुर
- अभिषेक राजपूत – महोबा (उ.प्र.) / वीआईपी रोड, रायपुर
- अमरेन्द्र राजपूत – अहमदाबाद (गुजरात) / विधानसभा क्षेत्र, रायपुर
- गुरप्रीत सिंह – अमृतसर (पंजाब) / वीआईपी रोड, रायपुर
- मनीष पाल उर्फ मोनू – फर्रुखाबाद (उ.प्र.) / वीआईपी रोड, रायपुर
- प्रताप सिंह – गुरदासपुर (पंजाब) / वीआईपी रोड, रायपुर
- अजय सिंह राजपूत – अहमदाबाद (गुजरात) / वीआईपी रोड, रायपुर
- राकेश राजभर – अहमदाबाद (गुजरात) / वीआईपी रोड, रायपुर
- उत्तम दुबे – बस्ती (उ.प्र.) / वीआईपी रोड, रायपुर
पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और अब इसके अन्य लिंक की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


