भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला: फरार निलंबित SDM निर्भय साहू ने किया सरेंडर, 14 दिन की पुलिस रिमांड..

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रायपुर// छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। लंबे समय से फरार चल रहे निलंबित एसडीएम निर्भय कुमार साहू ने आखिरकार सरेंडर कर दिया है। उन्होंने ACB/EOW की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया, जहां से उन्हें 14 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

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फरार निलंबित एसडीएम निर्भय कुमार साहू

यह मामला ACB/EOW में दर्ज अपराध क्रमांक 30/2025 से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 420, 120बी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धाराएं 7सी और 12 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, निर्भय कुमार साहू उस समय अभनपुर में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) एवं सक्षम प्राधिकारी, भू-अर्जन के पद पर पदस्थ थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थ पटवारी, राजस्व निरीक्षक और जमीन कारोबारियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से मुआवजा घोटाले को अंजाम दिया।

बताया जा रहा है कि रायपुर-विशाखापट्नम और दुर्ग बायपास भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में भारी अनियमितताएं की गईं। तहसील अभनपुर के ग्राम नायकबांथा, उगेतरा, उरला, भेलवाडीह और टोकरो की जमीनों को बैक डेट में छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि का भुगतान किया गया।

इतना ही नहीं, नायकबांधा जलाशय की पहले से अधिग्रहित भूमि को दोबारा भारतमाला परियोजना के नाम पर अधिग्रहित दिखाकर फिर से मुआवजा दिया गया। इस पूरे फर्जीवाड़े से शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस साजिश में कुछ जमीन कारोबारी और अन्य सहयोगी भी शामिल थे, जिनमें हरमीत सिंह खनूजा और उमा तिवारी जैसे नाम सामने आए हैं। मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि कुछ आरोपी फरार बताए जा रहे थे।

निर्भय साहू ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ विशेष न्यायालय से स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी की गई थी। इसके बावजूद वह लगातार फरार चल रहे थे और उनकी तलाश की जा रही थी।अब सरेंडर के बाद ACB/EOW उन्हें 17 मार्च 2026 से 30 मार्च 2026 तक पुलिस रिमांड में लेकर पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि इस पूछताछ के दौरान घोटाले से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

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