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सरगुजा// छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम फैसला सामने आया है, जहां अदालत ने रिश्वतखोरी के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एक क्लर्क को सजा सुनाई है। यह मामला सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड का है, जहां एक सेवानिवृत्त शिक्षक को अपने ही हक की राशि पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े।
जानकारी के अनुसार, ग्राम शांतिपारा निवासी 65 वर्षीय बरनाबस मिंज फरवरी 2017 में पूर्व माध्यमिक शाला घोघरा से प्रधान पाठक (हेडमास्टर) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद उन्हें ग्रेच्युटी के रूप में करीब 15 लाख रुपये तो मिल गए, लेकिन अवकाश नगदीकरण (Leave Encashment) के 6 लाख रुपये और सातवें वेतनमान के एरियर्स के करीब 1 लाख रुपये लंबे समय से लंबित थे।
अपने बकाया लगभग 7 लाख रुपये पाने के लिए वे लगातार बतौली स्थित बीईओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। इसी दौरान वहां पदस्थ लेखापाल (सहायक ग्रेड-02) प्रमोद गुप्ता ने उनके बिलों को पास करने और कोषालय भेजने के बदले रिश्वत की मांग की। आरोपी ने अवकाश नगदीकरण के बिल के लिए 60 हजार रुपये और एरियर्स के लिए 10 हजार रुपये की मांग की थी।
बुजुर्ग शिक्षक ने इस भ्रष्टाचार के सामने झुकने के बजाय इसके खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। उन्होंने 17 सितंबर को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अंबिकापुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाने की योजना बनाई
30 दिसंबर 2020 को एसीबी की टीम ने बीईओ कार्यालय में ट्रैप बिछाया। जैसे ही बरनाबस मिंज ने आरोपी को रिश्वत के 10 हजार रुपये की पहली किश्त सौंपी, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के हाथों को रासायनिक घोल से धुलवाने पर उनका रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
जांच पूरी होने के बाद 16 जुलाई 2021 को विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अंबिकापुर में चालान पेश किया गया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। विशेष न्यायाधीश ने 9 अप्रैल को अपना फैसला सुनाते हुए प्रमोद गुप्ता को 3 साल के सश्रम कारावास और 5000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।


