एंटी करप्शन ब्यूरो का एक्शन, 10 हजार रुपये रिश्वत लेते दो कृषि अधिकारी गिरफ्तार, लगातार कार्रवाई के बाद भी भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं..

शेयर करें...

रायपुर// छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई के बावजूद रिश्वतखोरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला कांकेर जिले के आमाबेड़ा तहसील क्षेत्र का है, जहां एसीबी की टीम ने दो ग्रामीण कृषि विकास विस्तार अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। आरोप है कि किसानों को फसल बीमा की राशि दिलाने के बदले पैसों की मांग की गई थी। इस कार्रवाई ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के दावों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं

Join WhatsApp Group Click Here

जानकारी के मुताबिक आमाबेड़ा तहसील के आलानार पंचायत निवासी किसान सुनील कोमरा और सगाऊ कोमरा से फसल बीमा की राशि दिलाने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगी गई थी। किसानों ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन किया और आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की योजना बनाई। बताया जा रहा है कि बुधवार को किसान 10 हजार रुपये लेकर कृषि विस्तार अधिकारी के पास पहुंचा।

इसी दौरान एसीबी की टीम ने कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ लिया। आरोपियों की पहचान प्रवीण चंद्राकर और सुंदर बछड़ के रूप में बताई गई है। एसीबी की कार्रवाई के बाद कृषि विभाग में हलचल है। मामले में आरोपियों की भूमिका, कथित रिश्वत की बरामदगी और अन्य साक्ष्यों से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है। जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही मामले के सभी पहलू स्पष्ट हो सकेंगे। कांकेर की यह कार्रवाई एक बार फिर सरकारी तंत्र में जवाबदेही की जरूरत को सामने लाती है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में ACB समय-समय पर रिश्वतखोरी की शिकायतों पर कार्रवाई करती रही है। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना इस सवाल को गंभीर बनाता है कि आखिर भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने में चुनौती कहां है ? कांकेर का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें किसानों को फसल बीमा की राशि दिलाने के बदले कथित रिश्वत मांगने का आरोप है।

फसल बीमा जैसी योजनाएं किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से चलाई जाती हैं। ऐसे में यदि योजना का लाभ दिलाने के लिए ही रिश्वत मांगे जाने का आरोप सामने आता है, तो यह सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। सवाल यह है कि जब भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, तो सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसानों को शिकायत करने की नौबत क्यों आ रही है ?

Scroll to Top