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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया तहसील अंतर्गत साल्हेओना-चंद्रपुर मुख्य मार्ग पर धोबनीपाली के पास खेत की सुरक्षा के लिए की गई कांटेदार तारबंदी में डीसी करंट प्रवाहित किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि फसल को मवेशियों से बचाने के लिए सड़क से लगे खेत के चारों ओर लगाए गए तार में इतना तेज करंट प्रवाहित हो रहा है कि उसके पास जाने पर चट-चट की आवाज सुनाई देती है। यदि तार में करंट प्रवाहित होने की पुष्टि होती है, तो यह राहगीरों, किसानों और मवेशियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि फसल की सुरक्षा के नाम पर किसी की जान जोखिम में डालना कितना उचित है?
फसल बचाने के लिए करंट, लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
ग्रामीण मार्गों के किनारे खेतों में कांटेदार तार लगाना आम बात है, लेकिन उसी तार में बिजली का करंट प्रवाहित करना जानलेवा साबित हो सकता है। सड़क से गुजरने वाला कोई व्यक्ति अनजाने में तार के संपर्क में आ जाए या कोई मवेशी इसकी चपेट में आ जाए, तो गंभीर हादसा हो सकता है। खासकर रात के समय या अंधेरे में तार दिखाई नहीं देने पर खतरा और बढ़ जाता है। खेत में काम करने वाले मजदूरों और आसपास से गुजरने वाले लोगों के लिए भी ऐसी व्यवस्था जोखिम पैदा कर सकती है।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, संबंधित किसान का कहना था कि फसल को मवेशियों से बचाने के लिए डीसी करंट लगाना जायज है। हालांकि, किसी निजी खेत में फसल की सुरक्षा के लिए करंट प्रवाहित करने की वैधता का फैसला संबंधित व्यक्ति के दावे से नहीं, बल्कि लागू नियमों और सक्षम विभाग की जांच से तय होगा।
विद्युत विभाग ने आदेश से किया इनकार
मामले में विद्युत विभाग के जिला अधिकारी पी.के. महानंदा ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कोई आदेश न तो विभाग की ओर से जारी किया गया है और न ही सरकार की ओर से। उन्होंने ऐसे आदेश होने के दावे को निराधार बताया। उनका कथन इस मामले में महत्वपूर्ण है, क्योंकि फसल सुरक्षा के नाम पर बिजली का इस्तेमाल करने को लेकर विभागीय अनुमति और सुरक्षा नियमों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
वहीं, संबंधित क्षेत्र के कनिष्ठ यंत्री से बातचीत के बाद उनके अधीनस्थ कर्मचारियों को मौके पर भेजे जाने की जानकारी मिली। कर्मचारियों ने संबंधित खेत और बोर की पहचान की तथा किसान को फोन के माध्यम से सूचना दिए जाने की बात सामने आई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मौके पर किसान ने डीसी करंट लगाने से संबंधित दस्तावेज होने की बात भी कही थी। हालांकि, इन दस्तावेजों की वास्तविकता और उनमें दर्ज अनुमति की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ठेका कर्मचारियों ने भी बताया गलत, फिर भी विवाद बरकरार
जानकारी के अनुसार, सीएसपीडीसीएल के ठेका कर्मचारियों ने भी संबंधित किसान को इस तरह करंट प्रवाहित करना गलत बताया था। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर विवाद के दौरान किसान की ओर से संतोषजनक जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें की गईं और उसे धमकी भरे लहजे में बात कही गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि किसान के सुपुत्र, जो राजनैतिक पार्टी से जुड़े बताए जा रहे हैं, मामले को लेकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे थे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
हादसे से पहले जांच और कार्रवाई जरूरी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खेत की तारबंदी में वास्तव में करंट प्रवाहित किया जा रहा है, तो उसे हटाने या सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। बिजली के करंट से होने वाला हादसा कुछ ही क्षणों में किसी व्यक्ति या मवेशी की जान ले सकता है। इसलिए मामले को केवल किसान और शिकायतकर्ता के बीच विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विद्युत विभाग और संबंधित प्रशासन को मौके की जांच कर तार में करंट प्रवाहित होने की स्थिति, उसके स्रोत और सुरक्षा व्यवस्था की पुष्टि करनी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, जांच पूरी होने तक संभावित खतरे को दूर करना जरूरी है, ताकि किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने की नौबत न आए।



