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सारंगढ़-बिलाईगढ़// छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ जिला शाखा सारंगढ़-बिलाईगढ़ की बैठक में इस बार सम्मान समारोह से ज्यादा चर्चा कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और उनके समाधान पर केंद्रित रही। संघ ने साफ शब्दों में कहा कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगा। कार्यक्रम में प्रांताध्यक्ष अजित दुबे सहित प्रांतीय और संभागीय पदाधिकारी मौजूद रहे। मंच के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं और त्वरित समाधान की मांग की।

मानसिक दबाव और कार्रवाई का भय
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उच्च अधिकारियों द्वारा बिना ठोस कारण के दबाव बनाया जा रहा है। बार-बार कार्रवाई की चेतावनी और दंडात्मक कदमों से कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है, जिसका सीधा असर विभागीय कार्यों पर पड़ रहा है। संघ ने मांग की कि अनावश्यक प्रताड़ना बंद कर स्वस्थ कार्य वातावरण बनाया जाए।
बिना जांच वेतन वृद्धि रोकने पर आपत्ति
संघ ने कई मामलों में बिना समुचित स्थल जांच और एकपक्षीय रिपोर्ट के आधार पर वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई पर आपत्ति जताई। परिसर रक्षक और वनपाल स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ की गई ऐसी कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच कर पुनर्विचार करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि किसी भी दंडात्मक कदम से पहले मौके का सत्यापन और कर्मचारियों का पक्ष सुनना जरूरी है।
मनरेगा और वृक्षारोपण कार्य में वसूली पर पुनर्विचार
मनरेगा मद अंतर्गत कराए गए वृक्षारोपण कार्यों में एकपक्षीय जांच के आधार पर वसूली की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। कर्मचारियों ने कहा कि परियोजना अवधि कोरोना काल से प्रभावित रही, फिर भी कार्य किया गया। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति का आकलन कर न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए।
स्टाफ की कमी और अतिरिक्त प्रभार
वनमंडल में कर्मचारियों की भारी कमी बताई गई। एक-एक कर्मचारी को दो से तीन परिसरों का प्रभार दिया जा रहा है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। संघ ने रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति और संतुलित पदस्थापना की मांग की। बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र में कई बीट प्रभारी अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। संघ ने उच्च स्तर पर पत्राचार कर बीएफओ की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
सुरक्षा और संसाधनों की मांग
मैदानी अमले ने बताया कि बीएफओ को दिन-रात अकेले गश्त करनी पड़ती है। अपराधियों और वन्यजीवों से खतरा बना रहता है। संघ ने प्रत्येक बीट में एक चौकीदार या गार्ड देने की मांग की। साथ ही जीपीएस, टॉर्च और पानी की बोतल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई।
प्रशासनिक पारदर्शिता और सुविधाएं
संघ ने कहा कि केवल व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आदेश जारी कर जवाब न देने पर कार्रवाई की चेतावनी देना उचित नहीं है। आधिकारिक माध्यम से संवाद हो।
इसके अलावा मांग की गई कि
- गोपनीय प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति समय पर दी जाए।
- विभागीय स्वीकृति आदेश और परियोजना प्रतिवेदन की प्रति संबंधित कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जाए।
- सभी कर्मचारियों के पहचान पत्र बनाए जाएं
- सेवा पुस्तिका की प्रति दी जाए।
- समयमान वेतनमान, लंबित वेतन और चिकित्सा प्रतिपूर्ति का शीघ्र भुगतान किया जाए।
- सेवानिवृत्ति से पहले पेंशन प्रकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।
संयुक्त निरीक्षण के बाद ही अतिक्रमण कार्रवाई
संघ ने यह भी कहा कि वन सीमा को केवल केएमएल आधार पर अवैध अतिक्रमण मानकर कार्रवाई का दबाव बनाना उचित नहीं है। वन और राजस्व विभाग के संयुक्त निरीक्षण के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई हो।
समाधान नहीं तो होगा आंदोलन
प्रांताध्यक्ष अजित दुबे ने आश्वासन दिया कि समस्याओं पर वनमंडलाधिकारी से चर्चा कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। वहीं जिलाध्यक्ष हीरालाल चौधरी ने कहा कि यदि समय रहते सुधार और निराकरण नहीं हुआ तो संघ चरणबद्ध आंदोलन करेगा। बैठक में साफ संदेश दिया गया कि कर्मचारी सम्मान चाहते हैं, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है समस्याओं का व्यावहारिक और स्थायी समाधान।




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