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रायपुर// प्रर्वतन निदेशालय की टीम ने मनीलांड्रिंग के मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बीएल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। ईडी की टीम ने सोमवार की शाम को देवेन्द्र नगर स्थित घर से यह गिरफ्तारी की है। साथ ही पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है। मंगलवार की सुबह विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पूर्व आईएएस बीएल अग्रवाल के खिलाफ यह मामला 2010 में आयकर छापे के बाद से उनके खिलाफ आईटी, सीबीआई और ईडी में मामले चल रहे हैं। आईएएस अग्रवाल द्वारा कालेधन को सफेद करने के लिए अपने सीए के माध्यम से खरोरा और उसके आसपास करीब 446 ग्रामीणों के नाम से बेनामी खाते खुलवाए थे। इसमें 2006 से 2009 के बीच 39 करोड़ रुपए जमा किए गए। इसका खुलासा होने के बाद आयकर विभाग और सीबीआई द्वारा मामले को जांच में लिया गया था। इस दौरान मनीलांड्रिंग के जरिए रकम की अफरा-तफरी की जानकारी मिलने के बाद ईडी ने मामले को जांच में लिया था।
इस तरह किया खेल
भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित की गई रकम को खपाने बीएल अग्रवाल द्वारा खरोरा के 446 ग्रामीणों के नाम पर बैंकों में फर्जी खाता खोला गया था। उन्हे अंधेरे में रखकर आईडी और फोटो लिए गए थे। साथ ही इन खातों में करोड़ों रुपए नकद जमा कराए जाते थे। बाद में इन खाता धारकों के नाम पर 13 फर्जी कंपनियों में रकम का निवेश किया गया था।
कैट से बहाल, मगर नहीं मिली ज्वॉइनिंग
सीबीआई ने रिश्वत देने के आरोप में आईएएस बीएल अग्रवाल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेशकर जेल भेज दिया था। इसे देखते हुवे तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। हालांकि जेल से छूटने के बाद बीएल अग्रवाल ने राज्य सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ कैट में अपनी याचिका लगाई थी। इसकी सुनवाई करते हुए कैट ने उन्हें बहाल कर दिया था। लेकिन फिलहाल मौजूदा राज्य सरकार ने उन्हें ज्वॉइन नही कराया।
रिश्वत मामले में हो चुकी है गिरफ्तारी
आईएएस बीए अग्रवाल की पहले भी गिरफ्तारी हो चुकी है। 2010 में प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) रहते हुए अग्रवाल के खिलाफ दो केस दर्ज किए गए। इसमें एक शासकीय योजनाओं में फर्जीवाड़ा और दूसरा आय से अधिक संपत्ति का मामला था। इन दोनों ही मामलों को खत्म करने के लिए 1 करोड़ 50 लाख की रिश्वत देने की पेशकश करने पर सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।


