बोंदा में स्थापित होने वाले नए क्रशर के खिलाफ ग्रामीण लामबंद, कलेक्टर जनदर्शन पहुंचकर एनओसी रोकने की उठाई मांग, बोले-बच्चों की पढ़ाई और सेहत पर पड़ेगा बुरा असर..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बोंदा के आश्रित ग्राम जोतपुर में नए क्रशर उद्योग की स्थापना को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और नए क्रशर के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी नहीं करने की मांग की। ग्रामीणों ने डिप्टी कलेक्टर राणा विजय से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित क्रशर की अनुमति पर रोक लगाने की मांग की।

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ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास पहले से तीन क्रशर संचालित हैं, जिनसे धूल और शोर की समस्या बनी हुई है। ऐसे में एक और क्रशर खुलने से बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

गांव के पास पहले से तीन क्रशर, अब चौथे का विरोध

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि जोतपुर के आसपास पहले से तीन क्रशर संचालित हैं। उनके अनुसार, इनसे निकलने वाली धूल और तेज आवाज के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने भूजल दूषित होने की आशंका जताते हुए सांस, त्वचा और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि गांव के नजदीक एक और क्रशर स्थापित होने से प्रदूषण की समस्या और बढ़ सकती है।

ग्रामीणों के मुताबिक, प्रस्तावित क्रशर आबादी वाले क्षेत्र से करीब 100 से 150 मीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने ग्राम पंचायत से एनओसी जारी नहीं करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास और उद्योगों की स्थापना के साथ लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।

दो स्कूल और बालक-कन्या छात्रावास पास होने का दावा

ग्रामीणों ने ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा शिक्षा से जुड़ा उठाया है। उनके अनुसार, प्रस्तावित क्रशर स्थल के पास शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं। इसके अलावा बालक और कन्या छात्रावास भी पास में स्थित हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि क्रशर से निकलने वाली धूल और लगातार होने वाले शोर से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने बाजार के पास स्थित पुराने सतनामी मोहल्ले का भी उल्लेख किया है, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। उनका कहना है कि घनी आबादी के इतने करीब क्रशर स्थापित होने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

23 अक्टूबर को सरपंच को भी सौंपा था आवेदन

ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में उन्होंने पहले ही 23 अक्टूबर 2026 को ग्राम पंचायत बोंदा के सरपंच को आवेदन सौंपा था। उस आवेदन में भी गांव के आसपास पहले से संचालित तीन क्रशरों, धूल से प्रभावित स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की समस्याओं का हवाला देते हुए नए क्रशर के लिए एनओसी नहीं देने की मांग की गई थी। इसके बाद अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई है।

कलेक्टर के नाम दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने जनस्वास्थ्य, बच्चों के भविष्य और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित क्रशर की एनओसी और अनुमति पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अगले कदम पर है।

जनदर्शन में अपनी मांग रखने पहुंचे ग्रामीणों में उग्रसेन साहू, संतोष चौहान, जीत कुमार रात्रे, क्षितेश कुमार वारे, प्रेम प्रकाश वारे, रामलल्ला टंडन, लोचन प्रसाद रात्रे, बेलाल कुर्रे, रामभारत रात्रे, बाजारू लहरे, मनोज बंजारे, दिलीप रात्रे, दुर्गेश सिदार, सेतकुमार महेश, षडानन मिरी, राजेंद्र टंडन, लखन लाल रात्रे, रामलाल पटेल, कन्हैया वारे, अनुराग कुर्रे, मानसी मिरी, महेशराम रात्रे, परेश्वर महेश, रामगोपाल टंडन, सुरेंद्र रात्रे, छतराम कठलाने और समीर रात्रे सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि जोतपुर में प्रस्तावित नए क्रशर की अनुमति देने से पहले स्थानीय आबादी, स्कूलों, छात्रावासों और पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की जांच की जाए। उनका कहना है कि जब तक इन समस्याओं का उचित समाधान नहीं होता, तब तक नए क्रशर के लिए एनओसी जारी नहीं की जानी चाहिए।

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