30 अक्टूबर तक भारी वाहनों पर रोक, 15 दिन में ही नियम बेअसर! नौघटा सड़क पर फिर बेधड़क दौड़ रहे फ्लाईऐश और भारी वाहन..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// नौघटा की जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों के चक्काजाम के बाद प्रशासन ने जिस सड़क पर 30 अक्टूबर तक फ्लाईऐश और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई थी, अब उसी सरकारी प्रतिबंध की खुलेआम अनदेखी होती नजर आ रही है।

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वहीं प्रतिबंध लगाने के 15 दिन के बाद से ही नियम बेअसर हो गए और वर्तमान में इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही फिर से बेधड़क जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सड़क की मरम्मत के लिए दो महीने तक भारी वाहनों को रोकने का निर्णय लिया गया था, तो आखिर यह प्रतिबंध जमीन पर लागू क्यों नहीं हो पा रहा है?

ग्रामीणों के चक्काजाम के बाद लिया गया था फैसला

दरअसल, 28 अगस्त को कटंगपाली से नौघटा जाने वाली सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने चक्काजाम किया था। फ्लाईऐश और क्रशर उद्योगों से जुड़े भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क जगह-जगह खराब हो चुकी थी। करीब दो साल पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क पर डामर और गिट्टी उखड़ गई थी और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे।

बारिश के दिनों में इन्हीं गड्ढों में पानी और कीचड़ भर रहा था, जबकि सूखे मौसम में उड़ती धूल से ग्रामीण परेशान थे। स्कूली बच्चों, दोपहिया वाहन चालकों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों की परेशानी को लेकर ग्रामीणों ने 12 अगस्त को कलेक्टर जनदर्शन में भी शिकायत की थी। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने 28 अगस्त को सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया था।

मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने माना, भारी वाहनों के बीच मरम्मत मुश्किल

चक्काजाम की सूचना पर सरिया थाना प्रभारी एनएल राठिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद सरिया तहसीलदार पुष्पेंद्र राज, सहायक खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग के सब इंजीनियर भी मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने सड़क की स्थिति का जायजा लिया था।

सड़क की हालत देखने पहुंचे अधिकारियों को भी अपना वाहन छोड़कर करीब 500 मीटर से अधिक दूरी पैदल तय करनी पड़ी थी। मौके पर मौजूद ठेका कर्मियों ने भी बताया था कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच सड़क की मरम्मत करना संभव नहीं होगा। इसके बाद प्रशासन की ओर से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था।

30 अक्टूबर तक रोक, फिर इतनी जल्दी कैसे लौटे भारी वाहन?

उस समय सरिया तहसीलदार पुष्पेंद्र सिंह राज ने कहा था कि सड़क की मरम्मत के लिए करीब दो माह तक इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी। कलेक्टर जनदर्शन में हुई शिकायत को देखते हुए खनिज विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे और क्रशर संचालकों तथा फ्लाईऐश डंप करने वालों से भी चर्चा की गई थी। लेकिन अब प्रतिबंध की अवधि पूरी होने से पहले ही सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। यानी जिस प्रतिबंध का उद्देश्य सड़क की मरम्मत के लिए समय और राहत देना था, वह करीब कुछ दिन बाद ही सवालों के घेरे में आ गया है।

सड़क वही, गड्ढे वही और भारी वाहन फिर उसी रास्ते पर

नौघटा के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग सड़क की मरम्मत और भारी वाहनों से राहत की थी। प्रशासन ने प्रतिबंध लगाकर सड़क मरम्मत का रास्ता साफ किया था, लेकिन अगर प्रतिबंध के बावजूद भारी वाहन इसी तरह चलते रहे तो सड़क की हालत सुधारने की कवायद का क्या मतलब रह जाएगा?

ग्रामीणों के मुताबिक फ्लाईऐश और क्रशर से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही इस सड़क की बदहाली की बड़ी वजह रही है। ऐसे में जब सड़क की मरम्मत पूरी होने तक भारी वाहनों को रोकने का निर्णय लिया गया था, तब प्रतिबंध के दौरान ही वाहनों का दोबारा चलना ग्रामीणों की परेशानी को फिर बढ़ा रहा है।

अब सवाल प्रशासन की निगरानी पर

ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए 30 अक्टूबर तक भारी वाहनों पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। लेकिन अब सड़क पर फिर से भारी वाहन दिखाई देने लगे हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?

अगर भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहती है तो सड़क की मरम्मत कैसे होगी और दो महीने की तय अवधि में सड़क को बेहतर बनाने का उद्देश्य कैसे पूरा होगा? ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल इस मार्ग पर निगरानी बढ़ाए और 30 अक्टूबर तक लगाए गए प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू कराए, ताकि सड़क की मरम्मत हो सके और स्कूली बच्चों सहित आम राहगीरों को राहत मिल सके।

फिलहाल नौघटा की सड़क पर भारी वाहनों की वापसी ने 28 अगस्त के चक्काजाम के बाद लिए गए प्रशासनिक फैसले पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस बार सिर्फ आदेश जारी करता है या प्रतिबंध का पालन भी सुनिश्चित कराया जाता है।

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