झीरम हत्याकांड के दोषियों को सजा पर गरमाई सियासत, भूपेश बोले – न्याय अधूरा, जांच भी अधूरी..

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रायपुर// छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद प्रदेश की सियासत फिर गरमा गई है। अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने झीरम घाटी हमले की कथित बड़ी साजिश की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अदालत का फैसला आने के बावजूद उनकी पार्टी की यह धारणा नहीं बदली है कि मामले में न्याय अधूरा है, क्योंकि जांच अधूरी है।

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भूपेश बघेल ने अपने बयान में कहा कि झीरम राजनीतिक जनसंहार के मामले में जिन लोगों को सजा दी गई है, वे उनके मुताबिक हमले को अंजाम देने वाले नक्सली तंत्र के निचले स्तर के लोग हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने कथित तौर पर षडयंत्र रचा और जिनके इशारे पर हमला हुआ, वे अब भी बाहर क्यों हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि नक्सलियों के बड़े नेताओं के नाम एनआईए की जांच से हटा दिए गए और उनके खिलाफ आरोप भी नहीं लगाए गए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि एनआईए ने कथित राजनीतिक षडयंत्र के पहलू की जांच नहीं की। ये आरोप कांग्रेस और भूपेश बघेल के राजनीतिक दावे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि न तो एनआईए ने कथित षडयंत्र की जांच की और न ही जांच आयोग इस पहलू तक पहुंच सका। उन्होंने भाजपा नेताओं पर भी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। बघेल के मुताबिक, अदालत के फैसले से कांग्रेस की यह मांग खत्म नहीं होती कि झीरम घाटी हमले के पीछे की पूरी साजिश की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि “न्याय अधूरा है क्योंकि जांच अधूरी है।”

कांग्रेस के सवाल सिर्फ सजा तक सीमित नहीं

झीरम मामले में कांग्रेस की ओर से अब मुख्य सवाल यह उठाया जा रहा है कि अदालत से दोषियों को सजा मिलने के बाद क्या हमले के पीछे की कथित व्यापक साजिश भी सामने आई है। यानी राजनीतिक विवाद का केंद्र अब केवल 10 दोषियों को मिली सजा नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या जांच एजेंसियां हमले के पीछे कथित साजिश, बड़े नक्सली नेतृत्व और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका तक पहुंच पाईं।

वहीं, अदालत का फैसला अपने आप में न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है और जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, उन्हें हाईकोर्ट में अपील का अधिकार दिया गया है। दूसरी तरफ कांग्रेस द्वारा उठाए गए षडयंत्र और जांच से जुड़े सवालों पर सरकार तथा भाजपा की प्रतिक्रिया भी इस राजनीतिक बहस का अगला अहम हिस्सा होगी

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