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रायगढ़// कला, संस्कृति और संगीत की समृद्ध परंपरा के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले रायगढ़ के 41 वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह का सोमवार को भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। राज्यपाल रमेन डेका ने भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।

समारोह के शुभारंभ अवसर पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’, छत्तीसगढ़ राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की प्रस्तुति हुई। राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ समारोह स्थल देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो उठा, वहीं छत्तीसगढ़ राज्यगीत ने प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता और गौरव को अभिव्यक्त किया।

पद्मश्री अनुज शर्मा की शानदार प्रस्तुति ने जीता दर्शकों का दिल
चक्रधर समारोह का पहला दिन कला और भक्ति के विविध रंगों से सजा। समारोह के शुभारंभ के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ और देर शाम पद्मश्री अनुज शर्मा की छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत से सजी प्रस्तुति ने समां बांध दिया। उनकी लोकप्रिय लोकधुनों पर दर्शक मंत्रमुग्ध होकर झूमते रहे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा रामलीला मैदान गूंज उठा।
पद्मश्री अनुज शर्मा ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत “अहो भजो मन गणपति गणराज, सुमति मन…” जैसी भक्तिमय प्रस्तुति से की। इसके बाद “मंगल भवन अमंगल हारी…”, “राम सिया राम” और “मैंने तेरे भरोसे हनुमान” जैसे भजनों ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ की माटी और लोकजीवन से जुड़े लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी। “अली गली में टुकनी मंगाये, मोर महामाई हरियर ज्वारा लागे वो”, “छइयां भुइयां”, “माते-माते रहिबे अलबेला मोर”, अहो दौना पान.. जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। वहीं “ससुराल गेंदा फूल” भोली सुरतिया, मया होगे तोर संग, ये प्रीत वाली रानी… जैसे लोकप्रिय गीत पर भी दर्शकों ने जमकर उत्साह दिखाया।
पंडवानी से पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने मोहा सबका मन
चक्रधर समारोह में पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने पंडवानी की प्रस्तुति दी। उन्होंने कपालिक शैली में हाथ में तंबूरा लेकर महाभारत के विभिन्न प्रसंगों का ओजस्वी और भावपूर्ण गायन किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। डॉ. उषा बारले ने अपनी विशिष्ट शैली में महाभारत के प्रसंगों को जीवंत करते हुए दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा से परिचित कराया। द्रौपदी चीरहरण, कीचक वध और ‘अमर कथा’ जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
कार्यक्रम में डॉ. उषा बारले की दोनों पुत्रियों ने छत्तीसगढ़ महतारी की आरती-पूजन का गायन किया। इसके बाद बाबा गुरु घासीदास के संदेशों पर आधारित गीतों के साथ पंथी नृत्य की प्रस्तुति हुई। पंथी नृत्य ने पूरे रामलीला मैदान को छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति से सराबोर कर दिया।
रामलीला मैदान में 14 से 23 सितम्बर तक आयोजित होने वाले चक्रधर समारोह में देशभर के ख्यातिलब्ध कलाकार संगीत, नृत्य और कला की विविध विधाओं की प्रस्तुतियां देंगे। बता दे कि समारोह रायगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला साधना और महाराजा चक्रधर सिंह की कला परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।



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