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सारंगढ़ बिलाईगढ़// जनपद पंचायत कार्यालय बरमकेला में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की सूची जैसी सामान्य प्रशासनिक जानकारी हासिल करने के लिए भी पत्रकार को कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। इसके बाद आवेदन लिया गया और जानकारी के नाम पर पूर्व सीईओ के हस्ताक्षर वाला पुराना दस्तावेज उपलब्ध कराया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने जनपद पंचायत की प्रशासनिक व्यवस्था और रिकॉर्ड अपडेट रखने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला पत्रकार देवराज दीपक द्वारा जनपद पंचायत बरमकेला में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों और विभिन्न विभागों की जानकारी मांगे जाने से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पत्रकार ने कार्यालय में जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कई दिनों तक मौखिक रूप से टालमटोल का सामना करना पड़ा। बाद में उनसे बाकायदा आवेदन देने को कहा गया। आवेदन देने के बाद भी मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं कराई गई।
वर्तमान जानकारी के बदले मिला पुराना दस्तावेज
पत्रकार को बाद में जो दस्तावेज उपलब्ध कराया गया, वह पूर्व सीईओ अजय पटेल के हस्ताक्षर वाला पुराना दस्तावेज बताया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वर्तमान में जनपद पंचायत की जिम्मेदारी प्रभारी सीईओ शिक्षा शर्मा के पास है, तो वर्तमान पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की जानकारी मांगने पर पूर्व सीईओ के समय की सूची क्यों दी गई?
यदि कार्यालय में वर्तमान पदस्थापना की अद्यतन सूची उपलब्ध है, तो उसे उपलब्ध कराने में देरी क्यों हुई? और यदि पुरानी सूची ही दी गई, तो क्या जनपद पंचायत कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारियों की वर्तमान पदस्थापना से जुड़ा रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जाता?
डिप्टी कलेक्टर स्तर की अधिकारी से जवाबदेही की उम्मीद
प्रभारी सीईओ शिक्षा शर्मा डिप्टी कलेक्टर स्तर की अधिकारी हैं। ऐसे में जनपद पंचायत जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में प्रशासनिक रिकॉर्ड व्यवस्थित और अद्यतन रखना तथा सामान्य प्रशासनिक जानकारी के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना प्रशासनिक व्यवस्था की बुनियादी अपेक्षा है।
यह मामला सिर्फ एक पत्रकार को जानकारी मिलने में हुई देरी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि यदि किसी आम नागरिक को जनपद पंचायत में वर्तमान अधिकारी-कर्मचारियों की सामान्य जानकारी चाहिए, तो क्या उसे भी कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे और अंत में पुराना रिकॉर्ड ही उपलब्ध कराया जाएगा?
अब जरूरत इस बात की है कि जनपद पंचायत कार्यालय वर्तमान पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की प्रमाणित और अद्यतन सूची उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी स्पष्ट हो कि पत्रकार द्वारा वर्तमान जानकारी मांगे जाने के बावजूद पुराने दस्तावेज के आधार पर जवाब क्यों दिया गया। मामला आखिर एक सूची का नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालय में रिकॉर्ड की अद्यतन स्थिति और सूचना देने की पारदर्शी व्यवस्था का है।



