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सारंगढ़-बिलाईगढ़// प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति भटगांव में हीरालाल चन्द्रा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने का मामला अब सवालों के घेरे में है। उपलब्ध विभागीय पत्रों और समिति से जुड़े रिकॉर्ड के अनुसार, चन्द्रा के पुराने कार्यकाल से करीब 2,000 नए बारदानों की कमी, चावल से जुड़ी कथित अनियमितता, शिकायतों और कारण बताओ नोटिस जैसे मामले जुड़े रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुराने मामलों की स्थिति स्पष्ट हुए बिना उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे दे दी गई?
मामले में सबसे अहम कड़ी 24 दिसंबर 2025 का सहकारिता विभाग का पत्र है। विभागीय पत्र में संबंधित कर्मचारी के पूर्व में बर्खास्त होने और न्यायालय से बहाली प्राप्त नहीं करने का उल्लेख करते हुए उन्हें तत्काल पद से पृथक कर किसी जिम्मेदार कर्मचारी को प्रभार सौंपने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद बाद में उन्हें फड़ प्रभारी और फिर सहायक प्रबंधक जैसी जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब सवाल है कि इसके लिए कोई नया आदेश जारी हुआ था या सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी?
करीब 2 हजार बारदानों की कमी का मामला भी सवालों में
चन्द्रा के पुराने कार्यकाल के दौरान भटगांव धान खरीदी केंद्र में करीब 2,000 नए बारदानों की कमी सामने आने की बात कही जा रही है। समिति के शिकायत पंजी में भी इसका उल्लेख होने की जानकारी है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि इन बारदानों की भरपाई हुई या नहीं, कितनी राशि की वसूली हुई और अगर प्रकरण का निराकरण हुआ तो किस अधिकारी के आदेश से हुआ।
इसी तरह गधाभाटा में विक्रेता के पद पर रहते चावल की मात्रा में कथित गड़बड़ी और बाद में भरपाई कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। धान खरीदी के दौरान शिकायत और कारण बताओ नोटिस जारी होने की बात भी कही जा रही है। इन सभी मामलों की वास्तविक स्थिति दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
विभागीय आदेश के बाद जिम्मेदारी कैसे मिली?
पूरा मामला सिर्फ एक कर्मचारी को जिम्मेदारी देने तक सीमित नहीं है। सवाल समिति की निर्णय प्रक्रिया पर भी है। यदि किसी कर्मचारी से जुड़े पुराने प्रशासनिक या वित्तीय मामले लंबित थे, तो नई जिम्मेदारी देने से पहले उन मामलों का रिकॉर्ड और अंतिम स्थिति देखना जरूरी था। खासकर तब, जब विभाग पहले ही संबंधित कर्मचारी को पद से पृथक करने का निर्देश दे चुका था।
अब यह भी जांच का विषय है कि 24 दिसंबर 2025 के विभागीय पत्र के बाद चन्द्रा को दोबारा जिम्मेदारी देने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई? क्या कोई नया विभागीय आदेश आया? क्या सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई? और क्या पूर्व के मामलों का अंतिम निराकरण हो चुका था? इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।
सहकारी समिति किसानों के हित, धान खरीदी और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था है। इसलिए जिम्मेदार पदों पर नियुक्ति और प्रभार की प्रक्रिया पारदर्शी होना जरूरी है। मामले में सहायक आयुक्त सहकारिता कामेश कुमार कश्यप ने कहा कि संबंधित कर्मचारी के पूर्व में बर्खास्त होने और न्यायालय से बहाली प्राप्त नहीं करने के संबंध में विभागीय पत्र जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि मामले में कार्रवाई की जाएगी।


