शेयर करें...
चार राज्यपाल और एक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुका है गांव, शिक्षा से लेकर सेना, चिकित्सा और इंजीनियरिंग तक गांव के युवाओं ने बनाई पहचान..
सारंगढ़-बिलाईगढ़// बरमकेला विकासखंड मुख्यालय से दक्षिण दिशा में स्थित छोटा सा गांव खिचरी इन दिनों अपनी प्रतिभाओं को लेकर चर्चा में है। करीब 500 की आबादी वाले इस गांव की शिक्षिका सुनीता यादव ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार हासिल कर प्रदेश सहित पूरे गांव का नाम देशभर में रोशन किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान प्राप्त करने वाली सुनीता यादव छत्तीसगढ़ से इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाली एकमात्र शिक्षिका हैं।
सुनीता यादव वर्तमान में बरमकेला विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी में पदस्थ हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए इससे पहले उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार और मुकुटधर पाण्डेय स्मृति शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। ये दोनों सम्मान उन्हें रायपुर के राजभवन और छत्तीसगढ़ मंडपम् में राज्यपाल के हाथों मिले थे। अब राष्ट्रीय स्तर का सम्मान मिलने से खिचरी गांव में खुशी का माहौल है।
एक ही गांव से लगातार सम्मानित हो रहे शिक्षक
खिचरी की खासियत सिर्फ सुनीता यादव तक सीमित नहीं है। इसी गांव के शासकीय विद्यालय में पदस्थ सरिता सिदार को भी इस वर्ष राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वहीं गांव के निवासी और वर्तमान में तारापुर हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ व्याख्याता भोजराम पटेल को वर्ष 2023 में राज्य शिक्षक पुरस्कार और वर्ष 2025 में डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार राज्यपाल के हाथों मिल चुका है।

भोजराम पटेल को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) में भी राज्य स्तर पर उत्कृष्ट जिला संगठक और श्रेष्ठ कार्यक्रम अधिकारी के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इस तरह शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में गांव के लोगों ने लगातार अपनी पहचान बनाई है।

गांव के सामाजिक कार्यकर्ता एवं भाजपा जिला उपाध्यक्ष मनोहर पटेल कहते हैं कि यह पूरे खिचरी गांव के लिए गर्व की बात है। उनका कहना है कि अब तक गांव के नाम चार राज्यपाल पुरस्कार और एक राष्ट्रपति पुरस्कार हो चुके हैं। उन्होंने सभी सम्मानित शिक्षकों को पूरे ग्रामवासियों की ओर से बधाई दी।
उन्होंने यह भी बताया कि गांव की बेटी अनिता पटेल, जो वर्तमान में आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रही हैं, को भी शिक्षिका सुनीता यादव के साथ राष्ट्रपति भवन, रायसीना हिल्स में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। गांव के लिए यह भी गौरव का विषय है।
प्रतिभाओं की उर्वरा भूमि है खिचरी की माटी
खिचरी की आबादी भले ही करीब 500 हो, लेकिन यहां से निकलने वाली प्रतिभाओं की संख्या किसी बड़े शहर से कम नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सेना, इंजीनियरिंग, वित्त, पुलिस और राजस्व जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में गांव के लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में गांव के लेफ्टिनेंट कमांडर कृपासिंधु पटेल, जो भारतीय नौसेना में हेलीकॉप्टर पायलट हैं, और लेफ्टिनेंट मनीष पटेल अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कृषि के क्षेत्र में किशन पटेल, पिता दयाराम पटेल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के गोल्ड मेडलिस्ट कृषि वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में पंजाब में पदस्थ हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में गांव की अर्चना पटेल, पिता मनोहर पटेल, महासमुंद में MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। वहीं आतिश महंत, पिता उदयनाथ महंत, कोरबा मेडिकल कॉलेज में MBBS अंतिम वर्ष के विद्यार्थी हैं।
इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी में भी गांव के युवा आगे
इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गांव के युवा हलधर पटेल, जो अपने समय के PET टॉपर रहे हैं, वर्तमान में हैदराबाद में कार्यरत हैं। गांव से जुड़े दो भाई महेश पटेल और सुरेश पटेल, पिता सुनील पटेल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में क्रमशः जर्मनी और अमेरिका में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं विनोद पटेल मुंबई की एक बड़ी कंपनी में कार्यरत हैं। प्रमोद पटेल राजस्व विभाग में तहसीलदार के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। अनिल सिदार वित्त विभाग, मंत्रालय रायपुर में कार्यरत हैं, जबकि उनके भाई आकाश सिदार पुलिस विभाग में चयनित हुए हैं।
पुलिस विभाग में गांव के गजानंद पटेल और केशव चौहान भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं अजय पटेल, पिता स्व. प्रेमलाल पटेल, का मंडी निरीक्षक के पद पर चयन हो चुका है। इसके अलावा गांव के एक दर्जन से अधिक युवा शिक्षक के रूप में अलग-अलग स्थानों पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बिजली, राजस्व और अन्य विभागों में भी गांव के कई युवा सेवाएं दे रहे हैं।
छोटी आबादी, बड़ी पहचान
खिचरी की कहानी बताती है कि प्रतिभा के लिए बड़े शहर में पैदा होना जरूरी नहीं है। सीमित संसाधनों और छोटी आबादी के बावजूद इस गांव के लोगों ने मेहनत और लगन से अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाली सुनीता यादव की उपलब्धि ने इस गांव की प्रतिभाओं को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। खिचरी के लिए यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मेहनत, शिक्षा और सपनों को पूरा करने की प्रेरणा भी है।




You must be logged in to post a comment.