डी-कंपनी का नाम लेकर अरबों रुपए की ठगी, पुणे से 7 आरोपी गिरफ्तार, 2005 से चल रहा था वॉश-वॉश गिरोह..

शेयर करें...

रायपुर// ‘डी ग्रुप कंपनी’ यानी ‘दाऊद ग्रुप’ से जुड़े होने का दावा कर लोगों पर रौब जमाने और काले कागजों को केमिकल से असली नोट में बदलने का झांसा देकर करोड़ों रुपये ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का रायपुर पुलिस ने खुलासा किया है। तेलीबांधा थाने में दर्ज 1.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले की जांच के दौरान एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा पुलिस ने पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया।

Join WhatsApp Group Click Here

गिरफ्तार आरोपियों में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन, मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, विवेक सिंह, शुभम पांडेय, योगेन्द्र चौहान और बालमुकुंद दीक्षित शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से चार करोड़ रुपये से अधिक नकदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले कागज, कांच की प्लेटें और अन्य सामग्री बरामद की है।

2005 से सक्रिय था गिरोह

पुलिस के मुताबिक यह गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय था और देशभर में 100 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना चुका है। आरोपी खुद को बड़े कारोबारियों, विदेशी निवेशकों और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते थे। नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ तस्वीरें दिखाकर अपनी पहुंच का भरोसा दिलाया जाता था। कई बार पांच सितारा होटलों में बैठक कर विदेशी निवेश, बड़े प्रोजेक्ट, रकम दोगुनी करने और कंपनी में पैसा लगाने जैसे प्रस्ताव दिए जाते थे। गिरोह के कुछ सदस्य गनमैन के साथ रहते थे, जिससे सामने वाले पर उनका प्रभाव और बढ़ जाता था। इसके बाद सुरक्षा मंजूरी, विदेशी केमिकल, परीक्षण और अन्य प्रक्रिया के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम वसूली जाती थी।

काले नोटो को असली बनाने का झांसा

गिरोह का सबसे बड़ा हथकंडा काले नोटों को केमिकल से असली बनाने का झांसा था। आरोपित नोट के आकार के काले कागज दिखाकर दावा करते थे कि विशेष केमिकल और विदेशी तकनीक से इन्हें असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है। भरोसा बढ़ाने के लिए पहले से तैयार असली नोटों की मदद से केमिकल प्रक्रिया का दिखावटी प्रदर्शन किया जाता था। कांच की प्लेटों और दूसरे सामान से पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक और वास्तविक दिखाया जाता था। इसी तरीके से रायपुर के एक व्यक्ति को भी रकम दोगुनी करने का झांसा दिया गया और अलग-अलग प्रक्रिया व खर्च के नाम पर उससे करीब 1.13 करोड़ रुपये ठग लिए गए। मामले में तेलीबांधा थाने में अपराध क्रमांक 330/26 के तहत धारा 318(4), 61(2) बीएनएस में अपराध दर्ज किया गया था।

मोबाइल चैट के जरिए गिरोह तक पहुंच पुलिस

जांच के दौरान पुलिस पहले दो महिला आरोपियों कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय और दीपिका पॉलीवाल तक पहुंची। उनके मोबाइल फोन की चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से गिरोह के दूसरे सदस्यों की जानकारी मिली। तकनीकी जांच में आरोपियों की लोकेशन पुणे में मिलने के बाद पुलिस टीम ने करीब एक सप्ताह तक निगरानी की और खंडाला के एक रिसॉर्ट में दबिश दी। पुलिस के मुताबिक उस समय गिरोह ने वाराणसी के एक व्यक्ति को भी रकम दोगुनी करने का झांसा देकर रिसॉर्ट बुलाया था। वह व्यक्ति करोड़ों रुपये लेकर पहुंचा था और रकम आरोपियों को सौंप चुका था। पुलिस ने मौके से आरोपियों को पकड़ा और नकदी सहित ठगी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की। पुलिस के अनुसार ‘कैप्टन’ और ‘बड़े सर’ पहले भी ठगी के मामलों में जेल जा चुके हैं।

फरार आरोपियों की तलाश जारी

अब पुलिस गिरोह के फरार सदस्यों और देशभर में फैले नेटवर्क की तलाश में जुटी है। पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और पुणे से पकड़े गए सात आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है। जांच में छत्तीसगढ़ के अलावा नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली सहित कई स्थानों पर इसी तरीके से ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक किन-किन लोगों से कितनी रकम ठगी, रकम कहां भेजी गई और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच आगे बढ़ने पर ठगी के मामलों और रकम का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।

Scroll to Top