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सारंगढ़-बिलाईगढ़// शराब दुकानों की सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों ने वेतन भुगतान और पीएफ को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की है। ईगल हंटर प्राइवेट लिमिटेड के अधीन काम कर रहे 33 सुरक्षा कर्मचारियों ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने पीएफ राशि को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने और सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की मांग की है।
दो महीने से वेतन अटका, कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानी
शिकायत में कर्मचारियों का कहना है कि वे शराब दुकानों पर नियमित रूप से सुरक्षा ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पिछले दो महीनों का वेतन अब तक नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो रही हैं।कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि वेतन भुगतान में पहले भी देरी होती रही है। ऐसे में लगातार वेतन का इंतजार करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
वेतन से पीएफ कटौती का भी आरोप
सुरक्षा कर्मियों ने शिकायत में पीएफ को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वेतन से पीएफ की राशि काटी जाती है, लेकिन संबंधित पीएफ खाते में राशि जमा हुई है या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं मिल रही है। कर्मचारियों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराकर पीएफ की स्थिति स्पष्ट कराने की मांग की है। यदि कर्मचारियों के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई है।
शराब दुकानों की सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
वेतन के साथ कर्मचारियों ने शराब दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी है। उनका कहना है कि कई दुकानों पर वर्तमान में केवल दो सुरक्षा कर्मियों के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जा रही है।कर्मचारियों ने प्रत्येक शराब दुकान पर तीन सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था किए जाने की मांग की है। उनका तर्क है कि अतिरिक्त कर्मचारी होने से ड्यूटी का बेहतर संचालन हो सकेगा और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
33 कर्मचारियों ने मिलकर की शिकायत
इस मामले में 33 सुरक्षा कर्मियों के नाम और संपर्क विवरण के साथ सामूहिक रूप से शिकायत की गई है। कर्मचारियों ने जिला प्रशासन से बकाया वेतन का भुगतान कराने, पीएफ संबंधी शिकायत की जांच करने और शराब दुकानों पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसी की ओर से किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों ने गंभीर अनियमितता पाए जाने की स्थिति में संबंधित एजेंसी को जिले से हटाने की मांग भी प्रशासन के समक्ष रखी है।
फिलहाल कर्मचारियों की शिकायत पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। दो महीने के वेतन भुगतान, पीएफ राशि और सुरक्षा कर्मियों की संख्या से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


