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रायपुर// छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शून्यकाल के दौरान राम मंदिर के चंदे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले ने सदन का माहौल गर्मा दिया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस विषय पर तत्काल चर्चा कराने की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव आते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि मामला जनहित और धार्मिक आस्था से जुड़ा है, इसलिए इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यह विषय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन सदन की कार्यवाही निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही संचालित होनी चाहिए।
सत्ता पक्ष के इस रुख पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचती है, जबकि अपने विषयों को प्राथमिकता देती है। इस दौरान दोनों पक्षों के सदस्य आमने-सामने आ गए और सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद बढ़ने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस के विधायक अपनी-अपनी सीटों से नारेबाजी करने लगे, जिससे कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही बाधित रही। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष की आसंदी ने स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
आसंदी के इस निर्णय के बाद विपक्ष ने विरोध दर्ज कराते हुए नारेबाजी जारी रखी। राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी देर तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिसके कारण सदन का वातावरण तनावपूर्ण बना रहा।


