राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का हुआ सुधार, 2 माह में 39.4% सुधार दर्ज..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// जिले में स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा के लिए कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पेंद्र कुमार वैष्णव के नेतृत्व में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अप्रैल 2026 में राज्य के जिलों में निचले स्तर पर रहने वाला जिला मात्र दो माह के भीतर गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में प्रभावी कार्य करते हुए महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज करने में सफल रहा है।

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जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित निरीक्षण, गैप एनालिसिस, रिकॉर्ड संधारण, संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, मरीज हितैषी सेवाओं तथा एनक्यूएएस मानकों के अनुरूप अधोसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों का सतत प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन किया गया।

इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अप्रैल 2026 में जिले का एनक्यूएएस स्कोर 27 प्रतिशत था, जो जून 2026 में बढ़कर 37.65 प्रतिशत हो गया। इस प्रकार जिले ने दो माह में 10.65 प्रतिशत अंकों की वृद्धि के साथ लगभग 39.4 प्रतिशत सुधार दर्ज किया है, जो राज्य स्तर पर गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र कुमार वैष्णव तथा तीनों विकासखंडों के बीएमओ बिलाईगढ़ के डॉ. शशि जायसवाल, सारंगढ़ के डॉ. आर.एन. सिदार एवं बरमकेला के डॉ. अवधेश पाणिग्राही के संयुक्त प्रयासों से प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था के लिए कार्ययोजना तैयार की गई। नियमित समीक्षा बैठकों, फील्ड विजिट एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से गुणवत्ता सुधार की संस्कृति विकसित की गई है।

जिले के 14 स्वास्थ्य संस्थानों ने प्राप्त की एनक्यूएएस पात्र

जिले की इस उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण संकेतक यह भी है कि कई स्वास्थ्य संस्थानों ने एनक्यूएएस के लिए सफलतापूर्वक पात्र प्राप्त की है। विकासखंड सारंगढ़ अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालपुर, कनकबीरा, गोड़म एवं भेड़वन तथा उप स्वास्थ्य केंद्र बेलाडुला, पचरी एवं सालर को एनक्यूएएस क्वालिफाइड घोषित किया गया है। वहीं विकासखंड बरमकेला अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेंधरा तथा उप स्वास्थ्य केंद्र पिहरा, साल्हेओना, नंदीगांव, लुकापारा, सोनबाला एवं रिसोरा ने भी यह उपलब्धि हासिल की है।

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