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रायपुर// छत्तीसगढ़ सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब आपातकाल के दौरान केवल जेल में बंद रहे लोगों को ही नहीं, बल्कि थानों में निरुद्ध रहे मीसाबंदियों को भी लोकतंत्र सेनानी का दर्जा और सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। सरकार के इस निर्णय से ऐसे कई लोग लाभान्वित होंगे, जो अब तक योजना से वंचित थे।
दरअसल, राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन कर पात्रता की शर्तों को और व्यापक बना दिया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले उन लोगों को भी पहचान मिलेगी, जिनके पास जेल जाने का रिकॉर्ड नहीं था लेकिन वे पुलिस हिरासत या थानों में निरुद्ध रहे थे।
हजारों लोगों के लिए खुला सम्मान निधि का रास्ता
नई व्यवस्था के तहत पात्र व्यक्तियों को अधिसूचना जारी होने के 90 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित जिला प्रशासन के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे ऐसे लोकतंत्र सेनानी सामने आ सकेंगे, जो वर्षों से सरकारी मान्यता और सहायता का इंतजार कर रहे थे।
रिकॉर्ड के आधार पर होगा सत्यापन
सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए आवेदकों को जेल अधीक्षक या संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद जिला स्तरीय समिति पात्रता की जांच करेगी और अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हिरासत की अवधि तय करेगी सम्मान राशि
सरकार ने सम्मान निधि को निरुद्ध अवधि से जोड़ दिया है। कम अवधि तक हिरासत में रहने वालों को भी आर्थिक सहायता मिलेगी, जबकि लंबे समय तक निरुद्ध रहे लोगों को अधिक राशि प्रदान की जाएगी।
- 1 माह से कम अवधि: ₹8,000 प्रतिमाह
- 1 माह से 5 माह तक: ₹15,000 प्रतिमाह
- 5 माह से अधिक अवधि: ₹25,000 प्रतिमाह
स्वास्थ्य सुविधाओं का भी मिलेगा लाभ
सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा है। पात्र लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वृद्ध लोकतंत्र सेनानियों को राहत मिलेगी। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को आपातकाल के दौर में संघर्ष करने वाले लोगों के सम्मान और पुनर्सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।


