शेयर करें...
सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया तहसील क्षेत्र में कोटवारी भूमि को लेकर उठ रहे सवाल अब और गहराते नजर आ रहे हैं। पार्ट-01 में जहां कोटवारी जमीन पर कथित कब्जे, निर्माण और अवैध खरीद-फरोख्त की चर्चाएं सामने आई थीं, वहीं अब नौघटा गांव का मामला चर्चा के केंद्र में आ गया है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर कोटवारी भूमि, जो मूल रूप से शासकीय व्यवस्था और ग्राम कोटवार की जिम्मेदारियों से जुड़ी मानी जाती है, वह निजी निर्माण और कथित लेन-देन का माध्यम कैसे बन रही है।
जानकारी के अनुसार नौघटा गांव के कोटवार सागर महंत द्वारा अपनी कोटवारी भूमि को गांव के मोहित डनसेना, फूलचंद डनसेना सहित अन्य लोगों को मौखिक रूप से टुकड़ों में बेचे जाने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि पर वर्तमान में मकान-बाड़ी निर्माण का कार्य भी कराया जा रहा है। यदि भूमि कोटवारी श्रेणी में दर्ज है और उसकी खरीदी-बिक्री पर नियम लागू हैं, तो फिर इस तरह का निर्माण और कथित सौदा किस आधार पर हुआ, यह बड़ा सवाल बन गया है।
इधर इस मामले को लेकर 27 मई को सुशासन तिहार शिविर, भीखमपुरा में लिखित शिकायत भी किया गया है। शिकायत के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिक गई है। लोगों का कहना है कि यदि कोटवारी भूमि से जुड़ा मामला शिकायत तक पहुंच चुका है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना जरूरी है, ताकि शासकीय भूमि और उससे जुड़े नियमों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
इधर पूरे मामले में राजस्व विभाग की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सवाल उठ रहा है कि जिन जमीनों की निगरानी और अभिलेखीय सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग पर है, वहां कथित खरीद-फरोख्त और निर्माण की स्थिति आखिर कैसे बनी? क्या यह केवल अनदेखी है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है…? या फिर संबंधित विभाग के लोग जान बूझकर अपनी चुप्पी साधे हुए है..? फिलहाल यह जांच का विषय है। अगर इस मामले पर उच्च स्तरीय जांच कमेटी बिठाकर नियमानुसार जांच किए जाएंगे तो बहुत बड़ा खुलासा होगा।
अगले अंक में राजस्व विभाग सहित अन्य जुड़े हुए लोगों की भूमिका और सामने आ रहे चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा किया जाएगा…?


