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सारंगढ़-बिलाईगढ़// थाना सरिया क्षेत्र से जुड़े पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी राहुल साहू को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को बाल सुरक्षा और महिला सम्मान के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायाधीश अमित राठौर की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं के तहत कारावास और जुर्माने से दंडित किया। फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की बात सामने आई है।
नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले गया था आरोपी
मामले के अनुसार थाना सरिया क्षेत्र के ग्राम जटीयापाली निवासी राहुल साहू पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने थाना सरिया में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी प्रमोद कुमार यादव द्वारा की गई, जिसमें घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए और आरोपी के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
जांच और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के माध्यम से यह प्रमाणित किया कि पीड़िता नाबालिग थी। इसी आधार पर मामला लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 यानी पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी राहुल साहू को दोषी ठहराया। न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत 5 वर्ष, धारा 87 के तहत 7 वर्ष तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4(1) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी पर जुर्माना भी लगाया गया।
पीड़िता के पुनर्वास के लिए प्रतिकर राशि की अनुशंसा
अदालत ने केवल सजा तक सीमित न रहते हुए पीड़िता के शारीरिक और मानसिक पुनर्वास को भी महत्वपूर्ण माना। न्यायालय ने पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत राज्य शासन को पीड़िता को प्रतिकर राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है। फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कानून की नजर में नाबालिग की सहमति मान्य नहीं होती।
विशेष लोक अभियोजक ने रखी प्रभावी पैरवी
मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रफुल्ल कुमार तिवारी ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष का पक्ष मजबूती से रखा। अदालत का यह फैसला समाज में बाल सुरक्षा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। स्थानीय स्तर पर भी इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां लोग इसे पीड़ित परिवार के लिए न्याय और अपराधियों के लिए कड़ा संदेश बता रहे हैं।


