रात के अंधेरे में जारी डीजल का खेल, किसानों को कम और उद्योगपतियों को मनमाना सप्लाई के आरोप..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// सरिया और बरमकेला क्षेत्र में डीजल संकट के बीच अब कालाबाजारी और मनमाने वितरण के आरोप लगातार तेज होते जा रहे हैं। खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में किसान जहां घंटों लाइन में खड़े होकर डीजल के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ पेट्रोल पंपों में रात के अंधेरे में उद्योगपतियों और बड़े कारोबारियों को भारी मात्रा में डीजल दिए जाने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कई पेट्रोल पंप संचालक नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।

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दरअसल, वैश्विक संकट और डीजल की कमी को देखते हुए जिला कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने हाल ही में जिले के पेट्रोल पंप संचालकों की बैठक लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। आदेश में कहा गया था कि डीजल केवल वाहनों में ही दिया जाएगा और हर वाहन के लिए निर्धारित मात्रा तय रहेगी, ताकि कालाबाजारी रोकी जा सके और किसानों को पर्याप्त डीजल उपलब्ध हो सके। लेकिन जमीनी हालात प्रशासनिक दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं।

खेत छोड़ लाइन में लग रहे किसान

इन दिनों क्षेत्र में धान कटाई और खेतों की जुताई का काम तेजी से चल रहा है। किसान ट्रैक्टर और हार्वेस्टर लेकर पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि घंटों इंतजार करने के बाद भी उन्हें तय मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा। कुछ जगहों पर सीमित मात्रा देकर वापस लौटा दिया जा रहा है, जबकि देर रात बड़े वाहनों और उद्योगों से जुड़े लोगों को आसानी से डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

प्रति लीटर 10 से 20 रुपये अतिरिक्त वसूली की चर्चा

सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि डीजल संकट के बीच कुछ जगहों पर प्रति लीटर 10 से 20 रुपये अतिरिक्त लेकर डीजल देने का खेल भी जारी है। आरोप है कि रात के समय मनमाने दाम पर डीजल सप्लाई किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इस तरह की चर्चाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच की जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आ सकती है।

जांच टीम बनने के बाद भी जारी है खेल

डीजल वितरण में अनियमितताओं की शिकायतों को देखते हुए कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने दो दिन पहले तहसील स्तर पर जांच टीम गठित की थी। इसमें तहसीलदार और खाद्य निरीक्षक को शामिल कर पेट्रोल पंपों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ कहा था कि कालाबाजारी या नियम उल्लंघन पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद क्षेत्र में रात के अंधेरे में डीजल वितरण और कथित अतिरिक्त वसूली का खेल जारी रहने की चर्चा प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रही है।

कार्रवाई का इंतजार, किसानों में बढ़ रही नाराजगी

अब किसानों और आम लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो खेती-किसानी का काम गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि पेट्रोल पंपों की अचानक जांच कर स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए, ताकि डीजल की कालाबाजारी और अवैध वसूली पर रोक लग सके तथा जरूरतमंद किसानों को राहत मिल सके।

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