शीशम पेड़ कटाई मामले में पटवारी पर सवाल, मौके पर मिले ठूंठ और अवशेष, फिर भी पंचनामा में नहीं है पेड़ काटने वालों के नाम का उल्लेख..

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सारंगढ़-बिलाईगढ़// ग्राम गोबरसिंहा में खेत की मेड़ से शीशम के पेड़ काटे जाने का मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। किसान टेकराम पटेल की शिकायत पर सोमवार 12 मई को पटवारी शंकर लाल सिदार को मौका निरीक्षण के लिए भेजा गया, लेकिन निरीक्षण के बाद तैयार किए गए पंचनामा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि पटवारी ने मौके पर मौजूद अहम तथ्यों को पंचनामा में दर्ज नहीं किया और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई।

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जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता टेकराम पटेल ने तहसीलदार सरिया को आवेदन देकर बताया था कि उनके निजी खेत की मेड़ पर लगे शीशम और अन्य पेड़ों की कटाई कर दी गई है। सोमवार को जब पटवारी मौके पर पहुंचे तो पीड़ित पक्ष को भी खेत पर बुलाया गया। मौके पर कटे हुए शीशम पेड़ों के ठूंठ साफ दिखाई दिए। इसके अलावा अन्य पेड़ों की कटी हुई डगाल और अवशेष भी खेत में पड़े मिले।

आरोप है कि इतनी स्पष्ट स्थिति होने के बावजूद पटवारी द्वारा बनाए गए पंचनामा में कई महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख ही नहीं किया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पंचनामा में खेत का खसरा नंबर तक दर्ज नहीं किया गया। वहीं मौके पर पड़े कटे हुए डगाल और पेड़ों के अवशेष का भी कोई जिक्र नहीं किया गया।

सबसे बड़ा आरोप यह लगाया जा रहा है कि मौके पर मौजूद नकुल पटेल द्वारा पेड़ काटने की बात मौखिक रूप से स्वीकार किए जाने के बाद भी उसे पंचनामा में शामिल नहीं किया गया। इससे ग्रामीणों और पीड़ित परिवार में नाराजगी बढ़ गई है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पटवारी द्वारा तैयार किया गया पंचनामा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता और इसमें जानबूझकर कई तथ्य छिपाए गए हैं। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल पीड़ित किसान को न्याय मिलने में परेशानी होगी, बल्कि शासन को भी गलत जानकारी दी जाएगी।

आइए जानते हैं पटवारी द्वारा बनाए गए पंचनामा की हकीकत

इस मामले में एक बात तो स्पष्ट रूप से सामने आ रही है कि आखिर पटवारी शंकरलाल सिदार को आनन-फानन में ऐसा पंचनामा क्यों तैयार करना पड़ा, जिसमें विवादित स्थल की भूमि का न तो खसरा नंबर दर्ज है और न ही रकबा। हद तो तब हो गई जब उक्त पंचनामा में उपस्थित लोगों के हस्ताक्षर भी कराए गए, लेकिन स्वयं पटवारी ने अपने हस्ताक्षर नहीं किए। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस मामले में आरोपियों को बचाने के लिए पटवारी द्वारा यह कृत्य किया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि मौके पर मौजूद साक्ष्यों को ही रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाएगा, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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