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सारंगढ़-बिलाईगढ़// नवगठित जिले में एक बार फिर कलेक्टर बदलने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जिले के गठन को अभी चार साल भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन इस दौरान कई बार कलेक्टर बदले जा चुके हैं। अब शासन ने नई जिम्मेदारी 2016 बैच की आईएएस अधिकारी पद्मिनी भोई साहू को सौंपी है, जो जिले की पांचवीं कलेक्टर होंगी। लगातार हो रहे इन बदलावों से लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि यह प्रशासनिक जरूरत है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है।
डॉ. कन्नौजे के तबादले से बढ़ी चर्चा
डॉ. संजय कन्नौजे अपने सरल और जनता से जुड़े कामकाज के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यकाल में कई विकास कार्यों को गति मिली थी और वे जनसुनवाई जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय रहते थे। ऐसे में उनका अचानक तबादला लोगों को हैरान कर गया। अब स्थानीय स्तर पर यह चर्चा हो रही है कि कहीं राजनीतिक खींचतान तो इस फैसले की वजह नहीं बनी।
सरकार के दावे और जमीनी स्थिति
हाल ही में राज्य सरकार ने कुछ समय तक आदेश जारी करता हुए तबादले नहीं करने की बात कही थी, ताकि प्रशासन में स्थिरता बनी रहे। लेकिन इसके बावजूद कलेक्टर का बदलना लोगों के लिए सवाल खड़े कर रहा है। आम लोगों के बीच यह बात चर्चा में है कि जब तबादलों पर रोक की बात थी, तो यह फैसला क्यों लिया गया।
नई कलेक्टर से उम्मीदें
अब जिले की जिम्मेदारी पद्मिनी भोई साहू के हाथों में है। उनकी पढ़ाई विज्ञान और कानून दोनों क्षेत्रों से जुड़ी है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वे प्रशासन को बेहतर तरीके से संभालेंगी। लोगों को भरोसा है कि वे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ जिले में स्थिरता भी लाने की कोशिश करेंगी।
सबसे बड़ी चुनौती.?
नया जिला होने के कारण यहां मजबूत प्रशासन की जरूरत है। बार-बार कलेक्टर बदलने से योजनाओं की रफ्तार धीमी हो जाती है और इसका असर सीधे आम जनता पर पड़ता है। अब सभी की नजर नई कलेक्टर पर है कि वे इन चुनौतियों से कैसे निपटती हैं और जिले को आगे बढ़ाती हैं।


