CGMSC घोटाले में EOW ने पेश किया चालान, नये तथ्यों का खुलासा, चार आरोपियों पर विस्तृत आरोप किये तय..

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रायपुर// छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGMSC घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB-EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरक चालान न्यायालय में पेश कर दिया है। यह चालान 16 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें कई नए तथ्यों का खुलासा हुआ है और चार आरोपियों के खिलाफ विस्तृत आरोप तय किए गए हैं।

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इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) के तहत संचालित ‘हमर लैब’ योजना में मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीद में भारी अनियमितताओं की जांच चल रही है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

पूरक चालान में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें अभिषेक कौशल (डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला), राकेश जैन (प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर), प्रिंस कोचर (लायजनर) और कुंजल शर्मा (मार्केटिंग हेड, डायसिस इंडिया प्रा.लि.) शामिल हैं।

जांच में यह सामने आया है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के लिए फर्मों के बीच आपसी साठगांठ (कार्टेलाइजेशन) की गई। तीन प्रमुख फर्मों रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स, श्री शारदा इंडस्ट्रीज और मोक्षित कॉर्पोरेशन ने मिलकर टेंडर में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। इन दस्तावेजों में उत्पादक क्षमता, सर्विस, मेंटेनेंस और इंस्टॉलेशन से जुड़ी जानकारियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था।

विवेचना में यह भी सामने आया कि तीनों फर्मों ने टेंडर में उत्पादों, पैक साइज, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स का विवरण एक ही पैटर्न में भरा था। यहां तक कि जिन उत्पादों का स्पष्ट उल्लेख टेंडर में नहीं था, उन्हें भी समान तरीके से दर्शाया गया। इससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित थी।

सबसे गंभीर आरोप कीमतों में हेरफेर को लेकर है। जांच के अनुसार, डायसिस कंपनी द्वारा तय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कहीं अधिक दर CGMSC को भेजी गई। आरोप है कि कुंजल शर्मा और मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा ने मिलकर साजिश के तहत कीमतों को बढ़ाकर पेश किया। इसके परिणामस्वरूप CGMSC ने उन्हीं ऊंची दरों को स्वीकार कर लिया।

इस गड़बड़ी के चलते मोक्षित कॉर्पोरेशन ने रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति वास्तविक कीमत से तीन गुना तक अधिक दर पर की, जिससे शासन को करीब 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई। यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा होने के कारण और भी गंभीर माना जा रहा है।

अब तक इस मामले में कुल 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है। हमर लैब योजना जैसी जनहित की योजना में हुई इस कथित गड़बड़ी ने सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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