शेयर करें...
दुर्ग// छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) के प्रकोप ने भारी तबाही मचा दी है। ग्राम मुड़पार और नारधा में फैले इस घातक संक्रमण के कारण अब तक 300 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग को 83 जीवित सूअरों का ‘कुलिंग ऑपरेशन’ करना पड़ा, ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके। इस पूरी घटना से स्थानीय पशुपालकों और फार्म संचालकों को लगभग 1.20 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
क्या है अफ्रीकी स्वाइन फीवर?
अफ्रीकी स्वाइन फीवर एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो केवल सूअरों को प्रभावित करती है। यह बीमारी बेहद तेजी से फैलती है और संक्रमित जानवरों की मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह वायरस इंसानों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता, लेकिन पशुधन पर इसका असर बेहद विनाशकारी होता है।
संक्रमण रोकने के लिए सख्त कदम
संक्रमण की पुष्टि होते ही पशुपालन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह सील कर दिया। मुड़पार और नारधा गांवों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि वायरस अन्य क्षेत्रों में न फैल सके।विभाग की टीम ने डॉ. वसीम सम्स के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर व्यापक अभियान चलाया। टीम के सदस्यों ने पीपीई किट पहनकर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मृत सूअरों को गहरे गड्ढों में दफनाया। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की गई, ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।
कुलिंग ऑपरेशन क्यों जरूरी?
अफ्रीकी स्वाइन फीवर का अभी तक कोई प्रभावी इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में संक्रमित और संभावित संक्रमित सूअरों को मारना ही संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इसी कारण विभाग ने 83 जीवित सूअरों को भी ‘कुलिंग’ के तहत नष्ट किया, ताकि वायरस के प्रसार को नियंत्रित किया जा सके।
आर्थिक नुकसान से जूझ रहे पशुपालक
इस घटना से सबसे ज्यादा प्रभावित स्थानीय पशुपालक और फार्म संचालक हुए हैं। सूअरों की मौत और कुलिंग ऑपरेशन के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। अनुमान के अनुसार, कुल नुकसान करीब 1.20 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कई छोटे पशुपालकों की आजीविका पूरी तरह इस व्यवसाय पर निर्भर थी, ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
पूरे जिले में अलर्ट जारी
स्थिति को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पूरे दुर्ग जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सभी पशुपालकों को अपने पशुओं की निगरानी बढ़ाने और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत विभाग को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।साथ ही, फार्मों में स्वच्छता और बायो-सिक्योरिटी के नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। बाहरी लोगों और वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण, नियमित सफाई और संक्रमण से बचाव के उपायों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बायो-सिक्योरिटी ही एकमात्र बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका बायो-सिक्योरिटी उपायों का पालन करना है। चूंकि इस बीमारी का कोई इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए संक्रमण को रोकना ही सबसे बड़ी चुनौती है।डॉ. वसीम सम्स ने स्पष्ट किया कि यह वायरस इंसानों को प्रभावित नहीं करता, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह तेजी से अन्य सूअरों में फैल सकता है। इसलिए हर स्तर पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।


