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बिलासपुर// छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिगों की संपत्ति से जुड़े मामलों में एक अहम और स्पष्ट फैसला सुनाया है, जो भविष्य के कई मामलों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। कोर्ट ने कहा है कि नाबालिग की संपत्ति बेचने की अनुमति देने का अधिकार फैमिली कोर्ट के पास नहीं, बल्कि संबंधित जिला न्यायालय के पास है।
यह फैसला कबीरधाम जिले से जुड़े एक प्रकरण में सुनाया गया, जिसमें नाबालिग बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण के लिए उनकी संपत्ति बेचने की अनुमति मांगी गई थी। याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट के माध्यम से जमीन बिक्री की अनुमति लेने का प्रयास किया था, लेकिन इस प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने विधिसम्मत नहीं माना।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नाबालिग की संपत्ति की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग की संपत्ति की बिक्री एक संवेदनशील विषय है, जिसमें किसी भी तरह की जल्दबाजी या प्रक्रिया में चूक बच्चों के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि भारतीय कानून के अनुसार नाबालिग की संपत्ति से जुड़े मामलों में जिला न्यायालय ही सक्षम प्राधिकारी है, जो सभी पहलुओं की गहन जांच के बाद ही अनुमति दे सकता है। फैमिली कोर्ट का क्षेत्राधिकार इस प्रकार के मामलों में लागू नहीं होता।इस मामले में हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा और स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि संपत्ति बिक्री की आवश्यकता है, तो संबंधित पक्ष को जिला न्यायालय में विधिवत आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न केवल नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले संभावित दुरुपयोग को भी रोकेगा। कई बार अभिभावक या संरक्षक बच्चों के नाम पर दर्ज संपत्ति को बेचने के लिए शॉर्टकट अपनाने की कोशिश करते हैं, जिसे अब इस फैसले के बाद रोकने में मदद मिलेगी।



