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सारंगढ़ बिलाईगढ़// सारंगढ़ के शासकीय लोचन प्रसाद पांड़े महाविद्यालय के समीप नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-1 कुटेला में आने वाला पुराना पत्थर खदान में फ्लाईएश भराव की अनुमति देने का मामला विधानसभा में गूंजा। सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े ने कुटेला के पुराने पत्थर खदानो में फ्लाईएश भरने का अनुमति देने का मामला उठाया जिसमें पर्यावरण मंत्री ओ.पी.चौधरी ने बताया कि पुराने खदानो मे किसी भी प्रकार से फ्लाईएश भरने की कोई अनुमति नही दिया गया है। लेकिन मौके स्थल पर कुटेला में 2 लाख मिट्रिक टन फ्लाईएश का डंपिंग कार्य अभी भी चल रहा है। जिससे पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
दरअसल सारंगढ़ के कुटेला क्षेत्र के पुराने पत्थर खदानों में फ्लाई ऐश की कथित अवैध डंपिंग को लेकर अब सियासी माहौल गरमा गया है। यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा में उस समय प्रमुखता से उठा, जब सारंगढ़ की विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने प्रश्न क्रमांक 1646 के माध्यम से सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा।
विधायक उत्तरी जांगड़े ने विधानसभा में प्रश्न उठाते हुए पूछा कि सारंगढ़ के कुटेला क्षेत्र की पुरानी पत्थर खदानों में आखिर किसकी अनुमति से फ्लाई ऐश डंपिंग की जा रही है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जल स्रोतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों, ठेकेदारों तथा अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
इस पर वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कुटेला क्षेत्र की पुरानी खदानों में फ्लाई ऐश डंपिंग के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति प्रदान नहीं की गई है। इसलिए इस संबंध में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। विधानसभा में सरकार के इस जवाब के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है। यदि पर्यावरण विभाग द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है, तो क्षेत्र में फ्लाई ऐश डंपिंग कैसे हो रही है। इससे प्रशासनिक लापरवाही अथवा अवैध गतिविधियों की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरे की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाई ऐश डंपिंग से आसपास के जल स्रोतों, खेतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर फ्लाई ऐश से उड़ने वाली धूल के कारण लोगों की आंखों, फेफड़ों और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि फ्लाई ऐश से भरे डंपरों के आवागमन के कारण कई जगह दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिनमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। वहीं सारंगढ़ के डिग्री कॉलेज के छात्र भी इस प्रदूषित वातावरण में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध डंपिंग में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद यह मामला केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक जवाबदेही का विषय भी बन गया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
अडानी पावर को मिला है 2 लाख मिट्रिक टन फ्लाईएश का काम
सारंगढ़ के कुटेला में शासकीय भूमि खसरा नंबर 6/1, रकबा 24.926 हेक्टेयर के 3 हेक्टेयर में अड़ानी पावर कंपनी को 12 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 2 लाख मिट्रिक टन फ्लाईएश डंपिग करने की अनुमति प्रदान किया गया है। हालांकि तकनिकी रूप से इस भूमि को पत्थर खदान नही माना गया है इस कारण से विधानसभा में पत्थर खदान को अनुमति नही देने की बात कही गई है। किन्तु वास्तविक में कुटेला जो कि नगर पालिका सारंगढ़ के वार्ड क्रमांक-1 में आता है वहा पर खसरा नंबर 6/1 शासकीय भूमि है जहा के 3 हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध रूप से पत्थर निकालने के लिये खदान बना दिया गया है। लगभग कई बरस तक सरकारी भूमि का अंधाधुंध खोदाई कर इसे इतना बड़ा गड्ढ़ा बना दिया गया कि 2 लाख मिट्रिक टन फ़्लाईएश आसानी से आ गया।
मामला विधानसभा मे गूंजने के बाद इस बात का आसार बढ़ गये है कि आखिर कुटेला की इस सरकारी भूमि को जिला प्रशासन खदान मानता है या सिर्फ गड्ढ़ा मानता है। सूत्रो की माने तो जिला प्रशासन गड्ढ़े के नाम पर फ्लाईएश डंप करने का अनुमति दिया है और विधानसभा मे सवाल पत्थर खदान को लेकर लगा है इस कारण से तकनिकी रूप से छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने चालाकी से जवाब दे दिया कि कोई खदान को फ्लाईएश डंपिंग का कोई अनुमति नही दिया है किन्तु 3 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि पर 2 लाख मिट्रिक टन फ्लाईएश शहर के भीतर से गुजरते हुए वार्ड क्रमांक-1 में डंप होने का मामला आने वाले दिनो मे और गहरा सकता है। इस मामले में क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू से संपर्क कर पूरे मामले में उनका पक्ष जानने के लिये मैसेज भी भेजा गया किन्तु उन्होने कोई भी रिप्लाई नही दिया।



