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सारंगढ़-बिलाईगढ़// शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर अशासकीय विद्यालय शिक्षण समिति सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

समिति ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा RTE के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस संबंध में हाई कोर्ट बिलासपुर में याचिका (WPC 4988/2025) दायर की गई थी। 19 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश में उच्च न्यायालय ने राज्य शासन को छह महीने के भीतर इस मांग पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
राशि बढ़ाने की मांग
समिति की मांग है कि RTE के तहत प्रति विद्यार्थी दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाई जाए। इसके तहत प्राथमिक कक्षाओं के लिए 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये, माध्यमिक कक्षाओं के लिए 11,500 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये और हाई व हायर सेकेंडरी कक्षाओं के लिए अधिकतम सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग की गई है। साथ ही बढ़ी हुई राशि को पिछले तीन वर्षों से लागू करने की भी मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इस संबंध में कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
असहयोग आंदोलन का ऐलान
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी की 1 मार्च को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक RTE के तहत प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाई जाती, तब तक प्रदेश भर के निजी स्कूल असहयोग आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन के तहत स्कूल शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी या नोडल प्राचार्य के किसी भी कार्य में निजी स्कूल सहयोग नहीं करेंगे और उनके पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब भी नहीं दिया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिले के निजी स्कूल संचालक और प्राचार्य बड़ी संख्या में सारंगढ़ में एकत्रित हुए। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी जेआर डहरिया और कलेक्ट्रेट में एडिशनल कलेक्टर टंडन को ज्ञापन सौंपा।इस मौके पर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष जुगल किशोर अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष विशंभर साहू, सचिव पीडी मानिकपुरी, कार्यकारी सचिव स्वर्णकार सहित कई स्कूल संचालक मौजूद रहे। संगठन ने स्पष्ट कहा कि जब तक शासन RTE की प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं करता, तब तक पूरे प्रदेश के निजी स्कूल सरकार के साथ असहयोग जारी रखेंगे।



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