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सारंगढ़-बिलाईगढ़// स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम, भीखमपुरा में आयोजित पांच दिवसीय श्रीविष्णु यज्ञ और श्रीराम कथा का भावपूर्ण समापन हुआ। अंतिम दिन कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी।
कामदगिरि पीठाधीश्वर चित्रकूट धाम के जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भाई की असली पहचान संपत्ति के बंटवारे से नहीं, बल्कि विपत्ति के समय साथ खड़े रहने से होती है। उन्होंने श्रीराम के वनवास प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुज लक्ष्मण ने वनवास को बोझ नहीं माना, बल्कि भाई के साथ विपत्ति साझा कर सच्चे भ्रातृ धर्म का पालन किया।
उन्होंने कहा कि लंका कांड में जब लक्ष्मण शक्ति बाण लगने से मूर्छित हुए, तब श्रीराम का व्याकुल होना और हनुमान का संजीवनी लाने के लिए तत्पर होना भक्ति और शक्ति का अद्भुत उदाहरण है। भक्ति से प्रेरित शक्ति ही सार्थक होती है। केवल शक्ति या संपत्ति का प्रदर्शन अंततः मनुष्य के अस्तित्व को कमजोर कर देता है।
स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज ने कहा कि रामचरित को समझने के लिए रामायण का अध्ययन आवश्यक है। राम नाम जीवन को जागृत करता है और अंत समय में यही नाम पार लगाता है। भक्ति की धारा कभी समाप्त नहीं होती, वही अमृत है।
कथा प्रारंभ से पहले विद्वान ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के साथ पादुका पूजन किया। समापन पर श्रीरामायण की मंगल आरती की गई। 14 वर्षीय माही पाणिग्राही ने शास्त्रीय भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा के अंतिम रात्रि में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्राही (भीखमपुरा), जुगलकिशोर अग्रवाल (सरिया), बैरागी पटेल (बुदबुदा), रुपधर पटेल (तालदेवरी), भोजराम पटेल (देवगांव), गजानंद निषाद (साल्हेओना), कुबेर चरण (बरगांव), चैतन पाणिग्राही (बिलाईगढ़), जगन्नाथ पटेल (बुदबुदा), कृष्ण चंद पुरोहित (गोविंदपुर) सहित स्थानीय व आसपास के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रजत जयंती वर्ष में होगा मारुति महायज्ञ
स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज ने घोषणा की कि स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम भीखमपुरा की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर अगले वर्ष रजत जयंती मनाई जाएगी। इस अवसर पर 16 से 20 फरवरी 2027 तक पांच दिवसीय मारुति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसमें देशभर के प्रमुख आश्रमों के छह आचार्य और धर्माचार्य शामिल होंगे।
गौसेवकों और आश्रम सेवकों का सम्मान
कथा के दौरान आश्रम से जुड़े गौसेवकों और सेवकों का फूलमाला और वस्त्र देकर सम्मान किया गया। स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि सेवा ही सच्ची साधना है और गौसेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। पांच दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने भीखमपुरा और आसपास के क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना दिया। श्रद्धालुओं ने इसे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने वाला अनुभव बताया।


