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रायपुर// छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सक्ती और पखांजूर से तीन पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई सामने आई है। इन मामलों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन शासकीय भूमि और धान खरीदी जैसे संवेदनशील मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
सक्ती: शासकीय भूमि में गड़बड़ी पर पटवारी निलंबित
सक्ती जिले के बाराद्वार तहसील में पदस्थ पटवारी मनहरण लाल राठौर को शासकीय भूमि में गंभीर गड़बड़ी के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पटवारी द्वारा शासकीय भूमि खसरा नंबर 1311 से संबंधित रिकॉर्ड में नियम विरुद्ध तरीके से छेड़छाड़ की गई। यह भूमि घास मद (चरनोई/शासकीय उपयोग) की श्रेणी में दर्ज थी, जिसे कथित तौर पर निजी भूमि के रूप में दर्ज कर बिक्री छांट जारी कर दी गई।
मामले का खुलासा उप पंजीयक कार्यालय की जांच के दौरान हुआ, जहां दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर संदेह गहराया। जांच में यह सामने आया कि पटवारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शासकीय रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की और नियमों की अनदेखी कर शासकीय भूमि को निजी दर्शाने की प्रक्रिया पूरी की। यह कृत्य न केवल गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग की श्रेणी में भी आता है।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के निर्देश पर सक्ती के एसडीएम ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत पटवारी मनहरण लाल राठौर को निलंबित कर दिया है। निलंबन के साथ ही मामले की विस्तृत जांच के संकेत भी दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गड़बड़ी में और कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
पखांजूर: धान खरीदी में लापरवाही पर दो पटवारी निलंबित
दूसरी ओर पखांजूर से भी प्रशासनिक कार्रवाई की बड़ी खबर सामने आई है। यहां धान खरीदी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरतने पर दो पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त पटवारी आशीष पावर और आकाश कश्यप ने मौके पर निरीक्षण किए बिना ही धान खरीदी से संबंधित टोकन का सत्यापन कर दिया था।
धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में मौके पर जाकर सत्यापन करना अनिवार्य होता है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को रोका जा सके। लेकिन दोनों पटवारियों द्वारा बिना स्थल निरीक्षण किए ही टोकन सत्यापन कर देना कार्य में गंभीर लापरवाही माना गया। इस पर एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए दोनों नोडल अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।


