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रायपुर// छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 को लेकर बेरोजगार युवाओं का गुस्सा अब सड़कों से निकलकर सत्ता के दरवाजे तक पहुंच गया है। D.Ed प्रशिक्षित शिक्षक अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई न होने से उनका सब्र टूटता जा रहा है। इसी नाराजगी के बीच गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने नवा रायपुर स्थित स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का घेराव कर दिया।
सुबह अचानक प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। हालात को संभालने के लिए मंत्री आवास के आसपास भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। अभ्यर्थियों को बंगले के बाहर ही रोक दिया गया, लेकिन वे वहीं बैठकर नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार जानबूझकर नियुक्ति में देरी कर रही है और सिर्फ बैठकों व फाइलों का बहाना बनाया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं का आक्रोश साफ नजर आया। नारे लगाते हुए उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। अभ्यर्थियों का कहना था कि अगर शासन-प्रशासन अधिकारी ही चला रहे हैं, तो मंत्रियों की भूमिका सिर्फ बयान देने तक क्यों सीमित है, जबकि बेरोजगार युवा ठंड में सड़कों पर बैठे हैं।
आंदोलन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जताई। युवाओं का साफ कहना है कि यह उनकी आखिरी लड़ाई है और वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। “या तो नौकरी मिलेगी, या फिर जान जाएगी” जैसे नारे आंदोलन की गंभीरता को साफ दिखा रहे हैं।
कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे चल रहे आमरण अनशन का असर अब अभ्यर्थियों की सेहत पर भी पड़ने लगा है। महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ कई परिवार धरना स्थल पर डटे हुए हैं। कुछ युवाओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद वे फिर से धरने पर लौट आए। आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर किसी के साथ अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने खाली पदों को तय समय में भरने का आदेश दिया था, इसके बावजूद करीब 2300 पद अब तक खाली हैं। काउंसलिंग पूरी हो चुकी है, पात्र अभ्यर्थी भी मौजूद हैं, फिर भी नियुक्ति नहीं दी जा रही। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार और शिक्षा विभाग किसका इंतजार कर रहे हैं।
अब हालात ऐसे बन गए हैं कि शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन सिर्फ नौकरी की मांग नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और व्यवस्था पर सीधा सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में अगर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और तेज होने के आसार साफ नजर आ रहे हैं।


