तमनार के बाद अब कोरबा में भी कोल ब्लाॅक का विरोध, ग्रामसभा की सहमति के बगैर प्रस्ताव, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे आदिवासी ग्रामीण..

शेयर करें...

कोरबा// रायगढ़ जिले के तमनार के बाद अब कोरबा में भी कोल ब्लाॅक के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा भड़क रहा है। पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाॅक के रानी अटारी क्षेत्र में प्रस्तावित विजय सेंट्रल कोल ब्लॉक को लेकर आदिवासी ग्रामीण अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गये है। वहीं ग्रामसभा की सहमति के बगैर प्रस्ताव लेने पर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस क्षेत्र में पहले ही एसईसीएल की दो भूमिगत खदान संचालित है। बावजूद इसके एसईसीएल प्रबंधन द्वारा आज भी ग्रामीणों की उपेक्षा की जा रही है।

Join WhatsApp Group Click Here

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कामर्शियल माइनिंग के तहत विजय सेंट्रल कोल ब्लॉक का आबंटन रूंगटा एंड संस को किया है। पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाक में इस कोल माइंस के खुलने से पहले ही ग्रामीण अपने जल-जंगल-जमीन की रक्षा को लेकर स्थानीय स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण खदान के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गए हैं। और किसी भी कीमत पर माइंस शुरू नहीं होने देने का ऐलान कर दिया हैं। आपको बता दे विजय सेंट्रल कोल ब्लाॅक के लिए करीब 290 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है।

जहां रूंगटा माइंस इस खदान को आपरेट करेगी। लेकिन खदान खुलने से पहले ही ग्रामीण कोल माइंस का सीधे तौर पर विरोध कर रहे है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले ही इस क्षेत्र में एसईसीएल की दो कोल माइंस संचालित हो रही हैं। जिससे पर्यावरण, जलस्रोत और आदिवासी जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले भी एसईसीएल प्रबंधन द्वारा खदान प्रभावित अनेक गांव को गोद लिया गया। लेकिन उन प्रभावित गांवों में आज ने तो कोई विकास कार्य कराये गये और ना ही कोई बुनियादी सुविधाएं प्रदान की गयी। जिससे आज भी स्थानीय आदिवासी ग्रामीण हलाकान है।

बगैर ग्रामसभा की सहमति पर भड़के ग्रामीण

रूंगटा माइंस के लिए प्रस्तावित कोल ब्लाॅक को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया, जब प्रशासन द्वारा चार ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मंगाए गए। इनमें से जलके और सेन्हा ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेज दिए गए। दोनों ग्राम पंचायतों में बगैर ग्राम सभा के ही सहमति का प्रस्ताव दिये जाने की जानकारी के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया है। कोयला खदान का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने अब दोनोें ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिवों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जलके और सेन्हा के सरपंचों के खिलाफ ग्रामीणों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल रानी अटारी और आसपास के इलाकों में कोल ब्लाॅक के विरोध में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। आदिवासी ग्रामीण खुलकर रूंगटा माइंस के विरोध में खड़े हैं और आंदोलन को और व्यापक व तेज करने के संकेत दे रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष डाॅ.महंत ने सरकार पर बोला हमला

कोरबा में कोल ब्लाॅक के विरोध को लेकर अब राजनीति भी गरमाने लगी है। कटघोरा में आयोजित कांग्रेस के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस विनाश रहित विकास में विश्वास करती है, जबकि भाजपा विनाश सहित विकास का मॉडल अपना रही है। महंत के इस बयान के बाद जहां सूबे की राजनीति गरमा गयी है। वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में आदिवासी ग्रामीण खुलकर रूंगटा माइंस का विरोध कर रहे है।

Scroll to Top