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रायगढ़// तमनार को नगर पंचायत बनाने की सरकारी तैयारी अब बड़े विवाद का रूप लेती जा रही है। ग्राम पंचायत तमनार और बासनपाली को मिलाकर नए शहरी निकाय के गठन का राजपत्र में प्रकाशन तो हो चुका है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ग्राम सभा में साफ शब्दों में कहा गया कि उन्हें शहर का दर्जा नहीं चाहिए।
तमनार में हाल ही में औद्योगिक जनसुनवाई को लेकर हुए विवाद के बाद अब नगर पंचायत का मुद्दा सामने आने से शासन और प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नगर पंचायत बनने से विकास कम और परेशानियां ज्यादा होंगी। सबसे बड़ा डर यह है कि शहरी निकाय बनने के बाद ग्राम सभा की ताकत खत्म हो जाएगी और आदिवासियों को पेसा कानून के तहत मिलने वाले विशेष अधिकार छिन जाएंगे।
टैक्स और नियमों से बढ़ेगी परेशानी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत बनते ही टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा। अभी ग्राम पंचायत में जो सुविधाएं सामान्य रूप से मिलती हैं, उनके लिए नगर पंचायत में टैक्स और शुल्क देना पड़ेगा। इसके अलावा छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी नक्शा पास कराना और अनुमति लेना जरूरी होगा, जो ग्रामीणों के लिए आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बनेगा।
जनसुनवाई का विवाद बना गुस्से की वजह
कुछ दिन पहले तमनार में जेपीएल की जनसुनवाई के दौरान हुए विवाद की टीस अभी भी लोगों के मन में है। उस घटना के बाद प्रशासन पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। शनिवार को हुई ग्राम सभा में भारी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी और नगर पंचायत के प्रस्ताव का विरोध इसी नाराजगी का साफ संकेत माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र आदिवासी बहुल है और ग्राम सभा सर्वोच्च है, तो जनभावना के खिलाफ फैसला क्यों थोपा जा रहा है।
विकास या अधिकार, यही सवाल
तमनार रायगढ़ जिले का अहम आर्थिक क्षेत्र जरूर है, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी जल, जंगल और जमीन की आजादी से जोड़कर देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने अधिकारों और पहचान की कीमत पर नहीं।
ग्राम सभा में जिस तरह एकजुट होकर नगर पंचायत के प्रस्ताव को नकारा गया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है। अगर शासन ने समय रहते ग्रामीणों की आवाज नहीं सुनी, तो तमनार का यह विरोध और तेज हो सकता है। फिलहाल ग्रामीणों में आक्रोश चरम पर है।


