शिक्षा विभाग ने किए 49 शिक्षक निलंबित, कांकेर के 38 शिक्षक के बाद 11 और शिक्षकों पर गिरी गाज..

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सरगुजा// शनिवार का दिन शिक्षकों के लिए अच्छा नहीं रहा। एक दिन दिन में 49 शिक्षकों को निलंबित किया गया है। कांकेर में 38 शिक्षकों के बाद अब सरगुजा में 11 शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है। शिक्षकों की इस कार्रवाई से हड़कंप है। जानकारी ये मिल रही है कि सोमवार तक ये संख्या और भी ज्यादा बढ़ेगी। दरअसल पोस्टिंग के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई करने का आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने दिया है। 13 जनवरी तक कार्रवाई कर 15 जनवरी तक पूरी रिपोर्ट मांगी गयी है। लिहाजा अब शिक्षा विभाग हरकत में आया है।

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कांकेर में 38 शिक्षकों के बाद सरगुजा जिले में जिला शिक्षा विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में शिक्षकों के विरुद्ध सख्त कदम उठाया है। युक्तियुक्तकरण (Rationalization) की प्रक्रिया के तहत नई पदस्थापना मिलने के बावजूद कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले 11 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षा विभाग और शिक्षक समुदाय में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शासन के निर्देशानुसार पिछले वर्ष सरगुजा जिले में करीब 600 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण के तहत स्थानांतरण किया गया था। इसका उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करना और शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाना था। इस प्रक्रिया के अंतर्गत अधिकांश शिक्षकों ने विभागीय आदेश का पालन करते हुए समय पर अपनी नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग कर ली।

आंकड़ों के अनुसार, युक्तियुक्तकरण के बाद लगभग 585 शिक्षकों ने अपने-अपने नवीन पदस्थापना विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कर लिया था। हालांकि, करीब 15 शिक्षक ऐसे रहे जिन्होंने बार-बार नोटिस जारी किए जाने और विभागीय स्तर पर समझाइश दिए जाने के बावजूद ज्वाइनिंग नहीं की। शिक्षा विभाग ने इसे शासकीय आदेश की अवहेलना और कर्तव्य में गंभीर लापरवाही माना।

इसी क्रम में विभाग ने जांच और प्रक्रिया पूरी करने के बाद 11 शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन शिक्षकों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है, जिसके चलते यह कठोर कार्रवाई की गई है।

जिला शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल 5 अन्य शिक्षक भी विभाग की निगरानी में हैं, जिनके विरुद्ध इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। इन शिक्षकों के मामले न्यायालय या उच्च कार्यालयों में लंबित बताए जा रहे हैं। विभाग का कहना है कि संबंधित प्रकरणों में न्यायालय और सक्षम प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार विधिवत कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग का तर्क है कि युक्तियुक्तकरण की पूरी प्रक्रिया छात्रों के हित और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की गई है। ऐसे में यदि कोई शिक्षक जानबूझकर आदेशों की अवहेलना करता है, तो इसका सीधा असर स्कूलों की पढ़ाई और बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। विभाग ने दो टूक कहा है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एक साथ इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों पर हुई कार्रवाई से जिले में शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। जहां कुछ शिक्षक इसे कठोर कदम बता रहे हैं, वहीं विभाग इसे व्यवस्था सुधारने के लिए जरूरी कार्रवाई मान रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग आगे भी ऐसे मामलों में सख्ती बरतने के मूड में है, ताकि शासकीय आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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