DMF मद में बड़ा घोटाला, अवैध कॉलोनी में सड़क निर्माण का आरोप, जांच टीम बनी लेकिन कार्रवाई ठप..

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मुंगेली// जिला बनने के बाद से ही मुंगेली में भ्रष्टाचार की परतें एक के बाद एक खुलती जा रही हैं। अब जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद में हुए कथित भयंकर भ्रष्टाचार और हेराफेरी का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनी में निजी भूमाफिया की जमीन पर DMF की राशि से सड़क निर्माण कराया गया और शासन को लाखों का चूना लगाया गया।

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इस मामले को लेकर मुंगेली निवासी अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी ने प्रवर्तन निदेशालय, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, एंटी करप्शन ब्यूरो सहित प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मुख्य सचिव और संभागायुक्त को शिकायत भेजी है। मुख्यमंत्री को स्मरण पत्र भी भेजा गया है। शिकायत में दोषी अधिकारियों और भूमाफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

शिकायत के अनुसार मुंगेली नगर पालिका परिषद क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 22 दीनदयाल वार्ड में स्थित सोनकर सेल्स अवैध कॉलोनी में DMF मद की राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि ग्राम पंचायत करही के माध्यम से 14.98 लाख रुपये की लागत से निजी व्यक्ति की जमीन पर सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण कराया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

सूचना के अधिकार के तहत सामने आए दस्तावेजों के अनुसार 21 अगस्त 2023 को DMF से इस सड़क निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। स्वीकृति आदेश की शर्त क्रमांक 07 में साफ लिखा है कि कार्य केवल निर्विवाद शासकीय भूमि पर ही कराया जाएगा और भू-अर्जन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद नगर पालिका से मिली लिखित जानकारी में स्पष्ट हुआ कि जिस स्थान पर सड़क बनी है, वह अवैध कॉलोनी और निजी भूमि है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने 23 अप्रैल 2025 को कलेक्टर मुंगेली को पत्र भेजकर वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक DMF मद से हुए सभी कार्यों की जानकारी 15 दिनों में देने को कहा था, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में नवंबर-दिसंबर में खबरें प्रकाशित होने और आरटीआई के जरिए जानकारी मांगे जाने पर कलेक्टर कार्यालय ने जिला पंचायत सीईओ को तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

इसके बाद 11 दिसंबर 2025 को DMF मद में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए तीन सदस्यीय जिला स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया। इस टीम में एसडीएम, नगर पालिका सीएमओ और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता को शामिल किया गया। आदेश में सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश थे, लेकिन 26 दिन बीतने के बाद भी जांच शुरू नहीं हो पाई है।

शिकायतकर्ता स्वतंत्र तिवारी का कहना है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेंगे। DMF जैसे महत्वपूर्ण फंड में हुए इस कथित घोटाले ने जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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