नेवासपुर में बाबा गुरु घासीदास जयंती का भव्य उत्सव: पंथी नृत्य, चौका आरती और जनसैलाब के बीच छाई श्रद्धा और आस्था, विधायक पुन्नूलाल मोहले हुए कार्यक्रम में शामिल

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मुंगेली । ग्राम नेवासपुर में संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास की जयंती 23 दिसम्बर को अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूरे ग्रामवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और पंथी नृत्य दल ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। नृत्य दल द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक पंथी नृत्यों ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया, और बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ने इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केबिनेट मंत्री और मुंगेली विधायक पुन्नू लाल मोहले ने कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने उपस्थित ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए बाबा गुरु घासीदास के जीवन और उनके सामाजिक संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज में समानता, सद्भाव और मानवता के महत्व को समझने का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरिता खूंटे, सरपंच ग्राम पंचायत नेवासपुर ने की। अपने भाषण में उन्होंने ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने में सहायक हैं। इस अवसर पर क्षेत्र के अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया। इनमें जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मीकांत भास्कर, जिला पंचायत सदस्य रजनी मानिक सोनवानी, क्षेत्र के जनपद सदस्य शक्ति सिंह ठाकुर, और प्रदेश प्रमुख आनंद देवांगन अपने साथियों के साथ उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यक्रम के महत्व और बाबा गुरु घासीदास के विचारों पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों को जागरूक किया।

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ग्रामीणों ने पूरे दिन और रात उत्सव का आनंद लिया। चौका आरती, जैतस्तंभ में ध्वजा रोहण, पूजा-अर्चना और सामूहिक पंथी नृत्य में सभी ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। बच्चों और युवाओं ने विशेष रूप से पंथी नृत्य में रुचि दिखाई। कार्यक्रम के समापन पर सरपंच सरिता खूंटे ने सभी उपस्थित नागरिकों का धन्यवाद किया और कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में भाईचारे और सामूहिक चेतना को बढ़ावा देते हैं।
इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि कैलाश खूंटे, पूर्व सरपंच जनक साहू, हेमंत डहरिया, पुनीत जांगड़े, अशोक खूंटे, रविशंकर खूंटे, भरत बंजारा, अजय खूंटे, कुमार गेंदले, परस जांगड़े सहित सतनामी समाज और अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे। नेवासपुर में बाबा गुरु घासीदास जयंती का यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यादगार रहा, बल्कि इसे स्थानीय लोगों के बीच सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक भी माना गया।

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