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बिलासपुर// छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय ने मस्तूरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल सोन में पदस्थ व्याख्याता नवरतन जायसवाल को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के अंतर्गत की गई है। जायसवाल पर आरोप था कि उन्होंने दो से अधिक जीवित संतान होने की जानकारी छुपाकर नौकरी प्राप्त की थी।
2011 में हुई थी नियुक्ति, जानकारी छिपाई : नवरतन जायसवाल की नियुक्ति वर्ष 2011 में शिक्षाकर्मी वर्ग-01 के रूप में हुई थी। नियुक्ति के समय उन्होंने प्रपत्र में केवल दो संतान होने का उल्लेख किया, जबकि जांच में यह सामने आया कि उनके चार जीवित संतान हैं, जिनमें से दो का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ है। नियम के अनुसार, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने पर व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता है।
गोदनामा का दिया था हवाला, अस्वीकार : शिकायत मिलने के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। नवरतन जायसवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसके जवाब में उन्होंने एक सामाजिक गोदनामा प्रस्तुत कर दो बच्चों को सौंपने की बात कही। हालांकि, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया।
तीन साल चली जांच, रिपोर्ट में दोष सिद्ध : यह शिकायत वर्ष 2021 में छत्तीसगढ़ लोक आयोग में दर्ज की गई थी। जांच की जिम्मेदारी पहले जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर और फिर संभागीय संयुक्त संचालक को सौंपी गई। लंबी जांच प्रक्रिया और पत्राचार के बाद रिपोर्ट में नवरतन जायसवाल दोषी पाए गए। इसके बाद 3 अप्रैल 2025 को लोक शिक्षण संचालनालय ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया।
कई अवसर मिलने के बाद कार्रवाई : इस दौरान जायसवाल को अपनी बात रखने के कई अवसर भी दिए गए, लेकिन आरोप सिद्ध होने के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।


