छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमले की आज दसवीं बरसी : 30 से ज्यादा कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता हुए थे शाहिद, झीरम के दरभा घाटी में हुआ था खूनी खेल..

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रायपुर/ छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमले की आज दसवीं बरसी है। झीरम की दरभा घाटी में हुए इस खूनी खेल में प्रदेश कांग्रेस के पहली पंक्ति के नेताओं के साथ 30 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता शहीद हो गए थे। इस हमले में घायल कांग्रेस के आधा दर्जन से ज्यादा नेता रायपुर के हैं।

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इनमें किसी को हाथ, किसी को पैर और किसी को कंधे पर गोली लगी थी। ये सभी स्वस्थ हैं लेकिन वे कहते हैं कि जिंदा हैं लेकिन शर्मिंदा हैं क्योंकि इतने बड़े मामले की जांच के लिए जिस एनआईए को जिम्मेदारी सौंपी गई थी उन्होंने पूछताछ नहीं की और रिपोर्ट सौंपकर मामले का खात्मा कर दिया।

इन्हीं घायलों में शामिल थे कांग्रेस नेता और वर्तमान में आरडीए के उपाध्यक्ष शिव सिंह ठाकुर। वे आज भी हमले को याद कर सिहर उठते हैं क्योंकि उनके कंधे में गोली लगी थी जो निकल गई लेकिन सात छर्रे अभी भी धंसे हुए है।

उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने जिस तरह से घटना को अंजाम दिया उससे साफ लगता है कि नक्सली परिवर्तन यात्रा के काफिले को रायपुर से ही मॉनिटरिंग कर रहे थे। सुकमा से निकलने के पहले जब तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल को बताया गया कि महेन्द्र कर्मा नक्सलियों के टारगेट में हैं तब पटेल ने विद्याचरण शुक्ल से गाड़ी लगवाने का आग्रह किया और महेन्द्र कर्मा को अपनी गाड़ी में बैठने कहा लेकिन कर्मा अपनी गाड़ी से निकल गए।

ठाकुर के मुताबिक वीसी की गाड़ी में बैठकर पटेल निकलने वाले थे लेकिन रेस्टहाउस में किसी कारण से वीसी रुक गए उन्हें देर होता देख पटेल अपनी गाड़ी से निकले। लेकिन नक्सलियों के पास यही फीडबैक था कि पटेल, वीसी के साथ आने वाले हैं। यही वजह है कि जब तक दरभा घाटी में वीसी की गाड़ी नहीं पहुंची तब तक रोड ब्लाक नहीं किया और जैसे ही वीसी की गाड़ी घाटी में घुसी नक्सलियों ने पेड़ काटकर रोड ब्लाकर कर दिया।

56 इनपुट थे लेकिन सुरक्षा व्यवस्था लचर थी: शर्मा

कांग्रेस नेता सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि एनआईए वालों ने शुरू में एक बार पूछताछ की थी। न्यायिक जांच आयोग वालों ने षड़यंत्र की जांच नहीं की सिर्फ लापरवाही के बारे में पूछा लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पुलिस के पास नक्सलियों की मौजूदगी के 56 इनपुट हाेने के बाद भी वहां के एसपी समेत सभी बड़े अफसर गायब थे। इतनी बड़ी घटना में आज तक लोगों काे न्याय नहीं मिल पाया है। क्योंकि नक्सली कभी किसी का नाम पूछकर नहीं मारते।

मैं जिस गाड़ी में था उसमें चार शहीद हो गए: चंद्राकर

हमले में घायल कांग्रेस नेता चौलेश्वर चंद्राकर बताते हैं कि वे जिस गाड़ी में बैठे थे उसमें चार लोग शहीद हो गए थे। नक्सली उनके पास पहुंचे, नाम पता पूछा और जंगल की ओर ले गए। उन्होंने अपना परिचय डॉक्टर के रुप मे दिया तो लगभग एक घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया लेकिन नक्सली सभी से महेन्द्र कर्मा और नंदकुमार पटेल के बारे में पूछ रहे थे।

एनआईए ने नहीं दिया चिट्‌ठी का जवाब : द्विवेदी

हाथ में गोली खाने वाले कांग्रेस नेता शिव नारायण द्विवेदी ने बताया कि अब तक उनसे एनआईए वालों ने पूछताछ नहीं की। पूछताछ के बिना ही आधी-अधूरी रिपाेर्ट सौंप दी गई। उन्होंने पूछताछ के लिए पिछले साल एनआईए को चिट्‌ठी भी लिखी थी लेकिन उसका भी आज तक जवाब नहीं आया है। पीड़ित लोग न्याय के लिए भटक रहे हैं।

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